जगदलपुर। बस्तर की पहाड़ी ढलान पर उपजने वाला कोसरा काफी मात्रा में नाशिक और कोलकाता जा रहा है और वहां इसे शुगर फ्री राइस तथा लव बर्ड दाना के रूप में पैकेजिंग कर पूरे देश में बेचा जा रहा हैं। मंडी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार हर साल कम से कम दस हजार क्विंटल कोसरा की निकासी यहां से हो रही है। बताया गया कि ग्रामीणों से इसे 15 रुपये प्रति किग्रा की दर से खरीद कर तथा इसकी पैकेजिंग कर सौ से डे़ढ़ सौ रुपये की दर से देश भर में बेचा जा रहा है।

हजार हेक्टेयर में उपज

उप संचालक कृषि कपिलदेव दीपक बताते हैं कि बस्तर के बास्तानार और नेतानार इलाके की ढलानी जमीन पर करीब एक हजार हेक्टेयर में कोसरा की खेती होती है । इसके अलावा इसका विपुल उत्पादन बैलाडीला की तराई के गांवों में भी होता है।

मोटा अनाज के रूप में वर्गीकृत कोसरा का उपयोग ग्रामीण चावल की तरह करते आए हैं, लेकिन जब से इसकी गिनती शुगर फ्री राइस में होने लगी है, इसकी मांग बढ़ गई है। सरकार ने अब ई- कृषि की व्यवस्था कर दी है। इसका फायदा ग्रामीणों को उठाना चाहिए।

समर्थन मूल्य तय हो

इधर कोलावा़ड़ा, नेतानार के किसान बताते हैं कि उनकी क्षमता नहीं है कि वे 25 किमी दूर कोसरा बेचने जगदलपुर मंडी जा सकें, इसलिए हाट-बाजारों में व्यापारियों को 15 रुपये की दर से कोसरा बेचने मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि आदिवासी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण उपज का भी समर्थन मूल्य निर्धारित करें, ताकि पारंपरिक कृषि करने वाले ग्रामीणों को उपज का सही दाम मिल सके।

मंडी पहुंच रहा माल

इन दिनों जिला के वनांचल का कोसरा व्यापारियों के माध्यम से मंडी पहुंचने लगा है। मंडी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बस्तर से कम से कम 10 हजार क्विंटल कोसरा नाशिक जा रहा है, चूंकि इस फसल पर मंडी शुल्क नहीं लगता इसलिए कई व्यापारी इसे सीधे बाहर भेज रहे हैं।

बताया गया कि नाशिक में इसकी पैकेजिंग शुगर फ्री राइस के रूप में हो रही है वहीं कोलकाता में इसकी पेंकिंग घरों में पालने वाले लवर बर्ड दाना के लिए होती है। एक किग्रा वाले इस पैकेट की कीमत सौ रुपये से डेढ़ सौ रुपये तक है।