जगदलपुर। बस्तर का प्रेमी अब प्रेमिका को फूल देकर, पान खिलाकर या कपड़ा भेंट कर अपने प्यार का इजहार नहीं करता। शिक्षा के साथ उनकी सोच में भी परिवर्तन आया है। अब वे अपनी प्रेमिका को निश्छल प्रेम के प्रतीक राधा -कृष्ण की तस्वीर भेंटकर प्रेम का इजहार करने लगे हैं, वहीं प्रेमिका से बतियाने के लिए मोबाइल सेट भी भेंट देने लगे हैं।

बस्तर में प्रेम का इजहार करने के पारंपरिक तरीके में बदलाव आ गया है। बस्तर के आदिवासी समाज में प्रेमिका को रिझाने का उपक्रम मेलामड़ई से प्रारंभ हो जाता है। उन्हें वेलेंटाइन डे जैसे किसी दिन विशेष का इंतजार नहीं रहता।

कुछ साल पहले तक प्रेमिका को मेला- मड़ई में पान खिलाकर या उसकी पसंद का सामान देकर रिझाने की परंपरा रही है लेकिन अब सोच और प्रेम इजहार के तरीके में बड़ा परिवर्तन आ गया है। तारापुर व मालगांव के सदाराम बघेल, मोतीराम नाग, कलचा के मदन नाग, बास्तानार की हिड़मे और शशि, करेकोट के चरणराम बताते हैं कि अब पहले की तरह फूल देकर या पान खिलाकर प्रेम का इजहार करने का तरीका बदल गया है।

पिछले तीन- चार साल में ही युवकयुवतियों का प्रेम इजहार बदला है। अब प्रेमी अपनी चहेती को राधा-कृष्ण की आकर्षक फोटो भेंट करता है, अगर लड़की उसे स्वीकारती है तभी इनका प्रेम परवान चढ़ता है वरन दोनों अलग जोड़ा तलाशते हैं।

नई परंपरा के चलते फ्रेम जड़ी राधा-कृष्ण की तस्वीर खूब बिकने लगी है। गुरूनानक चौक स्थित फोटो फ्रेम दुकान के यशपाल बताते हैं कि राधा-कृष्ण की फोटो आमतौर 15पर जन्माष्टमी के मौके पर ही बिकती रही है लेकिन अब ग्रामीण युवक आए दिन इसे खरीदने लगे हैं।

इधर दरभा के महादेव नाग, मावलीपदर के बोमड़ाराम, तीरथगढ़ के मोतीराम बताते हैं कि जब से मोबाइल का प्रचलन बढ़ा है, प्रेमी अपनी प्रेमिका को अपनी हैसियत के हिसाब से मोबाइल सेट भी देने लगे हैं। इससे उन्हें आपस में बातचीत करने का पूरा मौका मिल जाता है।