जगदलपुर । प्रेम दैदीप्यमान सूर्य की तरह है, जिसकी रश्मियों के संपर्क में आते ही हिंसा रूपी अंधकार मिट जाता है। इसका जीवंत उदाहरण बस्तर में देखने को मिल रहा है। जहां प्रेम अहिंसा का पाठ पढ़ा रहा है। उन दिलों को जीत रहा है, जिनमें प्रेम की जगह हिंसा ने डेरा जमा लिया था। उन्हें इंसान होने का मतलब समझा रही है।

पिछले कुछ सालों की बात करें तो केवल बस्तर में ही सैकड़ों नक्सली जोड़ों ने प्रेम विवाह कर नए जीवन में प्रवेश किया और बंदूक का साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया। यह सिलसिला तेजी से चल पड़ा है। नक्सल रणनीतिकार इससे बौखला उठे हैं, लेकिन यह उनके वश में नहीं कि इश्क पर रोक लगा सकें।

हिंसा छोड़कर विवाह बंधन में बंधने वाले प्रेमी जोड़े समाज की मुख्यधारा में आ रहे हैं। दरअसल नक्सल रणनीतिकार हमेशा ही प्रेम के खिलाफ रहे हैं। नक्सली संगठन में शामिल साथियों को भी शादी की इजाजत नहीं रहती है। उन पर कड़ी नजर रखी जाती है। हिंसा को अपना आदर्श मानने वाले इन नक्सली सरगनाओं को इस बात का इल्म है कि प्रेम के सामने हिंसा कतई नहीं टिक सकती, इसलिए उन्हें सबसे अधिक डर है तो प्रेम से।

जगरगुण्डा एरिया कमेटी के कमांडर बदरन्ना ने चिंतलनार दलम की लतक्का से विवाह किया और कोंटा में आत्मसर्मपण कर हिंसा को तिलांजलि दे दी। केशकाल डिवीजनल कमेटी के कमांडर केसन्ना ने नक्सल दलम की सदस्य सुनीता से शादी की। दक्षिण बस्तर एरिया कमटी के अर्जुन ने देवे से, बासागुड़ा के डिप्टी कमांडर जोगन्ना ने चंद्रक्का से, मद्देड़ के डिप्टी कमांडर अशोकन्ना ने नक्सल दलम की सदस्य जयकन्ना से विवाह किया।

इधर दक्षिण बस्तर स्पेशल जोनल कमेटी के लछन्ना और मद्देड़ के एरिया कमांडर रामाराव ने भी प्रेम विवाह कर हिंसा छोड़ दी। बदरन्ना व लतक्का बताते हैं कि उनके जैसे सैकड़ों युवा जोड़े नक्सल विचारधारा के खिलाफ बगावत कर प्रेम विवाह कर चुके हैं और अभी सैकड़ों ऐसा करने वाले हैं। इस जोड़े ने बताया कि वे जब तक नक्सली नेताओं की संगत में रहे, तनाव और मौत के साए में जीते रहे। आपस में बातें भी नहीं कर पाते थे।

नक्सलियों ने जबरन कर दी थी नसबंदी

बीते साल 10 फरवरी को बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दंपती में नागेश ने बताया कि उसके प्रेम-प्रसंग का पता चलने पर नक्सलियों ने उसकी नसबंदी कर दी थी, ताकि संतानसुख और परिवार बनाने से वंचित रह जाए। नागेश कहते हैं, हमने ठान लिया था कि आत्मसमर्पण कर विवाह करेंगे। अब हम बेहद खुश हैं। उम्मीद नहीं थी कि समाज हमें इतने अपनेपन के साथ अपनाएगा।

पुलिस देती है पूरी सुरक्षा

- आत्मसमर्पण कर परिवार बसा लेने वाले प्रेमी जोड़ों को पुलिस भी पूरी सुरक्षा दे रही है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाता है। नक्सली इनसे बदला लेने की फिराक में रहते हैं, लिहाजा पूरी सर्तकता बरती जाती है। - सुंदरराज पी. पुलिस उप महानिरीक्षक, दक्षिण बस्तर