जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

करीब 55 घन मीटर साल लक़ड़ी से तैयार विशाल बस्तर दशहरा के रथ को नीलाम में खरीदने के लिए खरीददार नहीं मिल रहे हैं। टेम्पल एस्टेट कमेटी रथ को लगातार नीलाम करने का प्रयास कर रही है। चर्चा है कि अगर किसी ने रथ नहीं खरीदा तो रथ काष्ठ वन विभाग को सौंप दी जाएगी। इधर नारायणपुर के कुछ उत्साही बस्तर दशहरा का रथ अपने यहां ले जाकर मावली मेला पर नई परंपरा शुरू करना चाहते हैं।

बस्तर दशहरा के लिए हर एक साल के अंतराल में चार और आठ पहियों वाले नए रथ का निर्माण किया जाता है। चूंकि दशहरा विधान के तहत चार पहियों वाला रथ फूल रथ कहलाता है और यह छह दिनों तक चलता है, वहीं आठ पहियों वाला विजय रथ भीतर और बाहर रैनी पर दो दिन खींचा जाता है। इन रथों को बनाने के लिए 50 से 55 घन मीटर साल काष्ठ का उपयोग होता है।

टेम्पल एस्टेट कमेटी हर दो साल बाद पुराने रथों की नीलामी करती रही है। पहले केन्द्रीय जेल वाले दशहरा रथों को खरीदते रहे हैं और विभिन्न कार्यालयों के लिए टेबल- कुर्सी और तखत आदि बनाकर देते रहे हैं लेकिन जेल प्रबंधन द्वारा अब रथों की खरीदी बंद कर दी गई है। एक बार विशाखापटनम के लोग रथ खरीदकर ले गए थे। वहीं दो साल पहले पुराने रथों को वन विभाग को सौपा गया था। सर्व विदित है कि दशहरा रथ में बलि दी जाती है, इसलिए किसी अप्रिय वारदात की आशंका से लोग इस रथ के किसी भी लक़ड़ी को अपने घर ले जाने से घबराते हैं। इसके चलते ही सिरहासार के सामने खुले में प़़ड़े इन रथों से काष्ठ की चोरी नहीं होती। इन भ्रांतियों के चलते ही काष्ठ व्यापारी गोंचा रथ को तो सहजता से खरीद लेते हैं लेकिन दशहरा के रथों को खरीदने से पीछे हटते हैं, इसलिए दशहरा रथों को बेचने में ब़ड़ी परेशानी आती है। बताया गया कि 15 दिसंबर के बाद टेम्पल कमेटी रथों की नीलामी की तैयारी कर रही है। वहीं यह चर्चा है कि इस बार भी दशहरा रथों के खरीददार नहीं मिले तो इन्हे वन विभाग को सौंपा जा सकता है।

इधर नई जानकारी सामने आई है कि नारायणपुर के कुछ उत्साही जन अपने मावली मेला में रथ संचलन की नई परंपरा शुरू करना चाहते हैं, इसलिए वे बस्तर कलेक्टर से रथ मांगने जगदलपुर आने वाले हैं। इस प्रस्ताव का शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने समर्र्थन किया है। इनका तर्क है कि नारायणपुर वालों को दशहरा का रथ दे दिया जाता है तो नया रथ बनाने के लिए नारायणपुर के जंगल कटने से बच जाएंगे।

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