जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

दो करोड़ रुपये की लागत से छह साल पहले शहर मध्य निर्मित जिला पुरातत्व संग्रहालय अधिकारियों की मनमानी के चलते उपेक्षित पड़ा है। बस्तर के विभिन्न स्थानों से प्राप्त हजारों साल पुराने सोना - चांदी के दुर्लभ सिक्कों को दर्शकों से दूर डबल लॉक में बंद कर रखा गया है। संग्रहालय में 18 लाख रुपये की लागत से तैयार थ्रीडी मैप भी धूल खा रहा है। अधिकारियों की मनमानी का हाल यह है कि यहां के संग्रहालयाध्यक्ष को निलंबित करने के छह महीने बाद भी संग्रहालय का चार्ज नए अधिकारी द्वारा नहीं लिया गया है।

सिरहासार के पास जिस जगह पर 2013 में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से तीन मंजिला भव्य संग्रहालय भवन बनाया गया है, वहां पहले बस्तर के शहीद व परलकोट के जमींदार गैंद सिंह का आवास था। बाद में इसी आवास में बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव की पत्नी महारानी वेदमती रहती थीं। उनकी मौत के बाद इस भवन को संग्रहालय बनाया गया था। इस भव्य भवन के भू-तल में पुरानी मूर्तियों का संग्रहालय है। पहली मंजिल में आदिवासी संस्कृति से संबंधित बेलमेटल और रियासतकालीन बंदूकें हैं। दूसरी और तीसरी मंजिल में निर्माण के छह साल बाद भी कुछ नहीं हो पाया है।

दुर्लभ सिक्के लॉकर व ट्रेजरी में

बस्तर संभाग के विभिन्न स्थानों से सोने - चांदी के हजारों साल पुराने सिक्के प्राप्त हुए हैं। इन्हें पूर्व अधिकारी के प्रयास से जिले के विभिन्न थानों से संग्रहालय में लाया गया है। करीब एक बोरी पुराने सिक्के जिला कोषालय के ट्रेजरी में आजादी के बाद से बंद पड़े हैं। जिन सिक्कों को संग्रहालय में रखा गया है, उन्हें दर्शक देख नहीं पा रहे हैं चूंकि इन्हें डबल लॉक में रखा गया है। चार साल पहले जब तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह यहां आए थे तब एक दिन के लिए इन सिक्कों को प्रदर्शित किया गया था। जिस कमरे में इन सिक्कों को प्रदर्शित किया गया था, उसे बंद कर दिया गया है। बताया गया कि यहां संग्रहित सिक्के नवमी से बारहवीं शताब्दी के हैं। इनका बेहद पुरातात्विक महत्व है लेकिन दर्शक इन्हें देख नहीं पा रहे हैं।

चार्ज लेने- देने पर विवाद

भ्रष्टाचार के एक आरोप के चलते यहां के पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष अमृतलाल पैकरा को निलंबित किया गया है और रायपुर में पदस्थ अधिकारी डीएस ध्रुव को जगदलपुर का चार्ज लेने कहा गया है लेकिन छह महीने बाद भी उन्होंने चार्ज नहीं लिया है। बताया गया कि ध्रुव चाहते हैं कि दुर्लभ सोना- चांदी के सिक्कों का हस्तांतरण मुद्राशास्त्रियों की उपस्थिति में भौतिक सत्यापन के साथ हो परन्तु अधिकारियों की मनमानी के चलते यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

लाखों का थ्रीडी मैप खा रहा धूल

तीन साल पहले पुरातत्व व संस्कृति विभाग ने 18 लाख रुपये की लागत से विशाल थ्रीडी मैप तैयार किया था जिसमें बस्तर के लगभग सभी दर्शनीय स्थलों की प्रतिकृति स्थापित है परन्तु विभागीय उदासीनता के चलते इसकी विधिवत साफ- सफाई नहीं हो पाई और अब यह मैप धूल खा रहा है। संग्रहालय की उपेक्षा का हाल यह है कि वर्ष 2010 के बाद रायपुर में बैठे विभाग के डायरेक्टर एक बार भी यहां झांकने तक नहीं आए हैं। तीन मंजिला संग्रहालय भवन कुछ चौकीदारों के भरोसे है। बताया गया कि इस संग्रहालय के बेहतर संचालन के लिए जिला पुरातत्व विभाग की एक समिति भी बनाई गई है जिसके अध्यक्ष कलेक्टर हैं लेकिन गठन के तीन वर्षों में कभी बैठक आयोजित कर सदस्यों की नहीं बुलाया गया है। भवन मेंटेनेंस के नाम पर विभागीय अधिकारी फर्जीवाड़ा करते आ रहे हैं।