जगदलपुर। ब्यूरो

विभिन्न हाट-बाजारों में बेचने लाए बटोरों को ग्रामीणों से जब्त कर वनकर्मी इन्हे छोड़ रहे हैं। इस कार्रवाई से बचने के लिए ग्रामीणों ने बटेर बेचने नया रास्ता ढूंढ लिया है। अब कुछ दलालों के माध्यम तोकापाल, नानगूर, नगरनार, धनपुंजी, दरभा,बस्तर लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के सैकड़ों बटेर क्रेताओं के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके चलते बटेरों की कीमत भी बढ़ गई है।

वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत वन्य प्राणियों का शिकार प्रतिबंधित है। लगातर घटती संख्या को देखते हुए बटेर को भी संरक्षण दिया जा रहा है। इसके चलते हाट बाजारों में बटेर बेचने वालों को पकड़ा जा रहा है और उनसे बटेर जब्त कर उन्हें छोड़ा जा रहा है। यह कार्य नगरनार, तोकापाल, बकावंड, लोहंडीगुड़ा आदि बाजारों में लगातार वनकर्मी कर रहे हैं। इससे बटेर बेचने वाले दहशत में हैं और बाजार में बेचने के बदले ग्राहक के घरों तक बटेर पहंचा रहे हैं। बताया गया कि बटेर प्रेमियों को इनके बाजार में आने का बेसब्री से इंतजार रहता है और वे मुंहमांगी कीमत पर बटेर खरीदने तत्पर रहते हैं। इसलिए वे बाजार क्षेत्र के अपने परिचितों को रुपए देकर बटेर खरीद कर रखने कहते हैं और सूचना मिलते ही इसे लेने पहुंच जाते हैं। इन दिनों शहर से लगे करकापाल, भाटीगुड़ा, लामनी, सरगीपाल, हाटकचोरा, बहादूरगुड़ा, कंगोली, धरमपुरा में बटोरों की घर पहुंच सेवा हो रही है। कई शहरी बटेरप्रेमी उपरोक्त स्थानों से बटेर उठा रहे हैं। बताया गया कि 100 रुपए जोड़ी की दर से बटेरों की जमकर खरीदी -बिक्री की जा रही है। मांझीगुड़ा के सुखदेव, बलराम और शंकर मांझी ने बताया कि कई लोग तो बटेर पकड़ने वालों के घरों में बैठ उनके लौटने का शाम तक इंतजार करते हैं, इसलिए भी बटेरों की कीमत ब़ढ़ गई है।

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