जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बस्तर महाराजा प्रवीर चंद भंजदेव का ग्रामीणों से आत्मीय संबंध रहा है। इसलिए आज भी ग्रामीण उनकी तस्वीरों को अपने घरों में मां दंतेश्वरी के रखना पसंद करते हैं। पंडरीपानी के पंतलू परिवार के साथ बस्तर महाराजा का आत्मीय संबंध रहा। वे लगातार चार वर्षों तक उसके घर आते रहे हैं। उनके द्वारा दी गई तस्वीर को यह परिवार 77 वर्षों से सहेज कर रखा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 63 पर स्थित पंडरीपानी में बस्तर का पुराना आम बगीचा है। इसका निर्माण हनुमंत पंतलू ने किया था। उनके नाती कमलेश पंतलु के पास बस्तर महाराजा प्रवीर चंद भंजदेव की एक दुर्लभ तस्वीर है। इसके संबंध में कमलेश बताते हैं कि उनके दादा हनुमंत पंतलू के साथ महाराजा का आत्मीय संबंध था वे 1937 से 1941 तक लगातार पंडरीपानी स्थित उनके निवास आते रहे। उन दिनों ही बस्तर महाराजा विदेश से पढ़ाई कर बस्तर लौटे थे। वे जीप से पंडरीपानी आते थे।

चालक उन्हें छोड़ककर लौट जाता था। वे अमराई के पास स्थित मंडप के झूले में बैठकर दूध पिया करते थे और किसी को बिना बताए ही अचानक ही गायब हो जाते थे। उन्होंने वर्ष 1941 में यह तस्वीर उनके दादा को भेंट किया था। तब से यह दुर्लभ तस्वीर उनके घर मे पुराने दिनों की याद दिला रहा है। कमलेश ने बताया कि कई लोग इस तस्वीर को मांगने पंडरीपानी पहुंचे थे परंतु आस्था के चलते हमने किसी को यह तस्वीर नहीं दी।