जगदलपुर। बस्तर में तेजी से सूख रहे सल्फी के पेेेेड़ों के कारण बस्तर बीयर के नाम से चर्चित सल्फी रस का संकलन कम होने लगा है, लेकिन मांग बदस्तूर जारी है, इसलिए इसका फायदा छिंदरस उतारने वाले ग्रामीण उतारने लगे हैं और बस्तर बीयर के नाम पर बाहर से आए लोगों को बेच रहे हैं।

ऐसा ही मामला शहर के ख़ड़कघाट में सामने आया है। यहां शहर के एक व्यक्ति ने अपनी निजी जमीन पर खड़े करीब दो दर्जन छिंद के पेड़ों को रस निकालने के लिए सिरिसगुड़ा के दो ग्रामीणों के पास साठ हजार रुपये में बेच दिया है। जिससे वे लगातार रस दोहन कर चित्रकोट और आसपास के मुर्गा बाजारों में बेच रहे हैं।

शहर में पुराना पुल मार्ग पर मुक्तिधाम के सामने शहर के एक व्यवसायी की जमीन है। जिस पर छोटे -ब़ड़े छिंद के करीब दो दर्जन वृक्ष हैं। इन दिनों इन हरे भरे प़ेडों पर रस एकत्र करने डिब्बे लटकाए गए हैं । इनके ऊपरी तनों में गहरा सुराख कर छिंदरस निकालने वाले सिरिसगुड़ा के युवक सुखराम मंडावी और जगदीश मंडावी ने बताया कि वे इस पेड़ों से रस एकत्र करने के लिए भू-स्वामी से साठ हजार रुपये में खरीदे हैं और इसे आसपास के चित्रकोट और कुछ मुर्गा बाजारों में बेच रहे हैं।

बताया गया कि इन दिनों बड़ी संख्या में सैलानी बस्तर आए हैं और वे 'बस्तर बीयर' चखना चाहते हैं। इसके चलते सल्फी की मांग भी बढ़ी हुई है। चूंकि सल्फी पेड़ों के सूखने से पर्याप्त मात्रा में रस नहीं मिल रहा है, इसलिए बस्तर के ग्रामीणों के अलावा सीमावर्ती राज्य आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से आए करीब पांच सौ लोग गांवों के छिंद पेड़ों को खरीदकर तथा रस निकाल कर बेच रहे हैं। बताया गया कि जिस तरह से ग्रामीण रस दोहन कर रहे हैं, उसके चलते करीब सौ साल तक खड़ा रहने वाला छिंद के पेड़ दो-तीन साल में ही सूख रहा है।