हेमंत कश्यप जगदलपुर। नईदुनिया एक तरफ जहां आए दिन लोगों को अपने धर्म के लिए लड़ते देखा जाता है वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर जमकर राजनीति भी होती है। इन विसंगतियों के बीच बस्तर के कुरंदी जंगल में बाघ की ऐसी गुफा है, जिसे हिंदू और इसाई समान सम्मान देते हैं।

महाशिवरात्रि पर जहां यहां के शिवलिंग की पूजा करने के बाद हिंदू बोल बम का जयकारा लगाते हैं वहीं क्रिसमस के दिन मसीही समाज के लोग सैकड़ों मोमबत्तियां जलाकर प्रभु ईसा मसीह का आव्हान करते हुए हल्लेलुय्याह कहते हैं। यह गुफा बाघ राउड़ (बाघ की गुफा) के नाम से चर्चित है।

यह स्थल बेहतर पिकनिक स्पॉट भी है। बस्तर वनमंडल अंर्तगत माचकोट वन परिक्षेत्र के पुलचा सर्किल के कक्ष क्रमांक 1829 पीएफ में गणेश बहार नाला के समीप डोलोमाइट की चटटानें हैं । इस चट्टानों के बीच ही कई प्राकृतिक गुफाएं हैं।

यहां की दो गुफाओं को ग्रामीण बाघों की गुफा कहते हैं और इन्हे राजा- रानी गुफा नाम दिए हैं। राजा गुफा को लोग पवित्र मानते हैं। इसके भीतर ग्रामीणों ने शिवलिंग स्थापित किया है। महाशिवरात्रि तथा कार्तिक पूर्णिमा के दिन ग्रामीण गणेश बहार में स्नान करने के बाद गुफा के भीतर प्रवेश कर महादेव की पूजा करते हैं।

ग्राम जीरागांव के धनसाय , मंगल, जैमन आदि बताते हैं कि गुफा में शिवलिंग कब से है और इसकी स्थापना किसने की है, आसपास के ग्रामीणों को भी ज्ञात नहीं है। इधर हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन बढ़ी संख्या में मसीही समाज के लोग बाघ राउड़ पहुंचते हैं और प्रभु यीसू के जन्मदिन पर सैकड़ों मोमबत्तियां जलाकर हल्लेलुय्याह (प्रभु की स्तुति हो) कह कर खुशी मनाते हैं। इस तरह बस्तर की एक गुफा दो धर्म के लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।