चांपा।नईदुनिया न्यूज। चांपा सेवा संस्थान के तत्वावधान में शनिवार की शाम हसदेव गंगा आरती का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसमें विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। इसके अलावा अन्य अतिथि तथा शहरवासियों की भीड़ उमड़ेगी, लेकिन जब तक हसदेव की बदहाली दूर नहीं होती, तब तक हसदेव के नाम पर आयोजित सभी कार्यक्रम निरर्थक माना जाएगा। पता चला है बीते साल हसदेव की सफाई के लिए स्वीकृत सीएसआर मद से दो करोड़ रुपए के लिए भी जिला प्रशासन हीलाहवाला कर रहा है। ऐसे में एकबार फिर से हसदेव का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है।

बीते साल कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन के हवाले से जनसंपर्क के जरिए एक खबर आई थी। इसमें कहा गया था कि चांपा एनीकट से कुदरी एनीकट तक हसदेव की सफाई के लिए सीएसआर मद से दो करोड़ रुपए मंजूर की गई है। इसके बाद चांपा एसडीएम यूके उर्वशा ने नपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल और हसदेव सेवा प्रकल्प के संयोजक अखिलेश कोमल पाण्डेय के साथ बैठक कर हसदेव की सफाई कराने रूपरेखा तैयार की थी। इतने महीने गुजरने के बाद हाल ही में जब नपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल स्वीकृत बजट के संबंध में जानकारी लेने कलेक्टर के पास पहुंचे तो उन्हें हसदेव सफाई के लिए कोई बजट नहीं होने की जानकारी मिली। इससे एकबार फिर से बदहाल हसदेव का मुद्दा जोर-शोर से उठने लगा है। बीते साल हसदेव महोत्सव के दौरान जब यह मुद्दा गरमाया, तब हसदेव सेवा प्रकल्प के संयोजक अखिलेश कोमल पाण्डेय ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्हें हसदेव संरक्षण की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय को ज्ञापन सौंपकर हसदेव के उदगम स्थल से लेकर शिवरीनारायण संगम स्थल तक सफाई कराने की मांग की थी। उन्होंने नदी तट पर बसे विभिन्न गांवों का भ्रमण कर लोगों से चर्चा भी की थी। इसके बाद नदी सफाई के लिए सीएसआर मद से बजट स्वीकृत करने की खबर आई थी। इधर, हसदेव के तट पर करीब आधा दर्जन औद्योगिक संयंत्र संचालित है। इनके द्वारा केमिकलयुक्त अपशिष्ट सीधे हसदेव में बहाने की खबर है तो वहीं पूरे चांपा शहर के नालियों का पानी सीधे हसदेव में मिल रहा है। इस वजह से खासकर डोंगाघाट चांपा से रपटाघाट तक नदी का क्षेत्र दलदल में तब्दील हो गया है। यहां निस्तार करने वाले लोग हसदेव के बजाय नाली का पानी उपयोग करने मजबूर हैं। ऐसे पानी का उपयोग करने से लोग जलजनित बीमारी के शिकार हो रहे हैं। जब तक हसदेव को स्वच्छ बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक हसदेव गंगा आरती, हसदेव महोत्सव सहित हसदेव के नाम पर आयोजित सभी कार्यक्रम निरर्थक है।

385 से मात्र 14 करोड़ पहुंचा

चांपा नगरपालिका ने पिछले कार्यकाल में हसदेव नदी को गंदगी से मुक्त कराने के लिए पहले करीब 300 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, जो बजट ज्यादा होने की स्थिति में मंजूर नहीं हो सका। इसके बाद समय के साथ इस परियोजना का बजट बढ़कर करीब 385 करोड़ हो गया। फिर भी शासन ने इस प्रोजेक्ट पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद बीते साल हसदेव महोत्सव में आए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कहने पर नपा ने फिर से 44 करोड़ का प्रपोजल भेजा था, लेकिन इस बजट को भी घटाकर मात्र 14 करोड़ का प्रपोजल भेजने को कहा गया था। इससे समझा जा सकता है कि सरकार बदहाल हसदेव के लिए कितना गंभीर है।

फोन तक रिसीव नहीं

रपटाघाट से कुदरी एनीकट तक हसदेव की सफाई के लिए स्वीकृत दो करोड़ के संबंध में हीलाहवाला किए जाने की जानकारी जब मिली, तब कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन से उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया। इसके बाद चांपा एसडीएम यूके उर्वशा को भी उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन एसडीएम से भी संपर्क नहीं हो सका।

''नाली के पानी से हसदेव पूरी तरह से प्रदूषित हो गई है। डोंगाघाट से रपटाघाट तक के क्षेत्र की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। ऐसे में गंगा आरती करना कहां तक उचित है। पहले हसदेव की बदहाली दूर करें, इसके बाद ही गंगा आरती सार्थक होगी।''

राजेश अग्रवाल

अध्यक्ष

नगरपालिका चांपा

''हसदेव को संरक्षित करने की लगातार मांग सीएम से लेकर पीएम तक की गई थी। उस समय दो करोड़ स्वीकृत होने की खबर आई थी। यदि हसदेव को संरक्षित करने प्रशासन हीलाहवाला करता है तो ग्रामीणों के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।''

अखिलेश कोमल पाण्डेय

संयोजक

हसदेव सेवा प्रकल्प

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