जांजगीर-चाम्पा। चांपा के हटरी में भकलू महराज की जय काली मंदिर में मिट्टी से निर्मित लगभग 63 साल पुरानी प्रतिमा स्थापित है। नगर में यह सर्वाधिक प्राचीन गणेश प्रतिमा है। इस प्रतिमा को चांपा के भकलू महाराज ने स्थापित किया था। प्रतिमा का निर्माण नगर के ही नारायण मिस्त्री ने किया है। इस प्रतिमा की ऊंचाई लगभग चार पुीट है। हर माह इस प्रतिमा का श्रृंगार बदला जाता है। गणेश जी की पूजा प्रतिदिन सुबह-शाम होती है।

गणेशोत्सव के अलावा अन्य दिनों में भी श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। नगर में गणेश की इतनी पुरानी प्रतिमा और कहीं नहीं है। जांजगीर-चांपा जिला के नगरपालिका चांपा के हटरी स्थित भकलू महराज की जय काली मंदिर में यह प्रतिमा स्थापित है।

इस प्रतिमा की स्थापना भकलू महाराज के द्वारा की गई थी। वे ब्रम्हचारी थे। इनकी मृत्यु के बाद दीपचंद शर्मा ने प्रतिमा की पूजा व देखभाल की। इसके पश्चात् इनके पुत्र धरमचंद शर्मा प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते थे। उनके निधन के बाद अब उनके बेटे नरेन्द्र शर्मा, हरिश शर्मा गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं।

इस चतुर्भुजी प्रतिमा में एक हाथ में डमरू, एक में पुरसा, एक हाथ में लड्डू है और एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार नगर के बिल्डर धीरेन्द्र वाजपेयी द्वारा कराया गया है। श्रद्धालुओं की ऐसी आस्था है कि भगवान गणेश की पूजा-अर्चना सच्चे मन से करने पर लोगों की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। नगर के लोग घर में शुभ कार्य विवाह, गृह प्रवेश आदि के अवसर पर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने अवश्य पहुंचते हैं। पुजारी नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि हर दिन सुबह-शाम भगवान की पूजा होती है।