रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथी (बसपा) के सबसे मजबूत गढ़ में शामिल जांजगीर-चांपा में इस बार रिकार्ड 65 फीसद वोटिंग हुई है। एससी आरक्षित प्रदेश की इस एकमात्र सीट पर संभवत: पहली बार मतदान का आंकड़ा इस स्तर तक पहुंचा है। राज्य के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत का निर्वाचन क्षेत्र सक्ती विधानसभा इसी संसदीय सीट में आता है।

पार्टी ने यहां से पूर्व सांसद पारसराम भारद्वाज के पुत्र रवि प्रकाशराम भारद्वाज को टिकट दिया है। भाजपा ने अपने पूर्व सांसद गुहाराम अजगले तो बसपा ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक दाउराम रत्नाकर पर दांव लगाया है। बसपा सुप्रीमो मायावती की एकमात्र आम सभा इसी सीट में हुई है। त्रिकोणीय संघर्ष में फंसी दिख रही इस सीट पर रिकार्ड वोटिंग का फायदा किसे होगा यह तो 23 मई को पता चलेगा।

विधानसभा में कांग्रेस का दबदबा

इस संसदीय क्षेत्र में विधानसभा सीटों के लिहाज से इस बार कांग्रेस का पलड़ा भारी है। आठ में से चार सीट कांग्रेस के पास है। बाकी चार में भाजपा और बसपा के पास दो-दो सीट है। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा के पास एक, कांग्रेस के पास दो और भाजपा के पाले में पांच सीटें थीं। लोकसभा का चुनाव भाजपा ने जीता था।

चार से सात फीसद तक अधिक मतदान

इस संसदीय क्षेत्र में शामिल जैजैपुर और पामगढ़ सीट इस वक्त बसपा के पास है। इन दोनों सीटों पर पिछले आम चुनाव की तुलना में इस बार करीब चार-चार फीसद अधिक मतदान हुआ है। भाजपा विधायकों वाली अकलतरा और जांजगीर में क्रमश: चार और छह फीसद मतदान ज्यादा हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष महंत की सीट सक्ती में छह, चंद्रपुर में तीन, बिलाईगढ़ में छह और कसडोल में चार फीसद अधिक मतदान हुआ है। इसमें पामगढ़ और बिलाईगढ़ एससी सीट है।

जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट

सीट 2013 2014 2018 2019*

अकलतरा 76.60 64.75 76.63 69.37

जांजगीर 74.00 63.81 72.41 69.74

सक्ती 76.25 64.55 75.49 70.58

चंद्रपुर 78.04 62.24 75.53 63.90

जैजैपुर 70.95 57.47 68.33 61.95

पामगढ़ 72.16 59.55 70.88 62.97

बिलाईगढ़ 72.51 59.21 71.75 65.60

कसडोल 75.31 55.79 74.17 60.10

मतदान के आंकड़े

2004 52.23

2009 48.57

2014 61.54

2019 65.08*

(*अंनतिम आंकड़े, इसमें बदलाव आ सकता है।)

वोटिंग का रचा इतिहास

जांजगीर संसदीय क्षेत्र के 34 वर्षों के इतिहास में पहली बार वोटिंग 65 फीसद तक पहुंचा है। इससे पहले 1998 में यहां 61 फीसद मतदान हुआ था। यह चुनाव कांग्रेस ने जीता था। इसके बाद 2014 में आंकड़ा 61 फीसद तक पहुंचा था।