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    दंतेवाड़ा के गदापाल में कहीं बगुलों से तो नहीं पहुंचा जापानी बुखार!

    Published: Thu, 07 Dec 2017 06:24 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:12 AM (IST)
    By: Editorial Team
    fever 07 12 2017

    योगेंद्र ठाकुर, दंतेवाड़ा। जापानी बुखार से मासूम की मौत के बाद इसके वायरस के यहां पहुंचने का माध्यम विशेषज्ञ खोज रहे हैं। डॉक्टरों की टीम गदापाल में डेरा लगाए हुए हैं वहीं आसपास के गांव में उम्मीद खोजी जा रही है। जानकार गांव के मवेशी, परिंदों से लेकर बस तक को अपने टारगेट में रखा है।

    गांव की एक बस सुकमा जिले तक संचालित होती रही है। जिसमें सवार होकर मासूम भी एक बार सुकमा जा चुकी है और इस बस से ग्रामीण मुर्गी-बतख लेकर गांव लौटे थे। इसके अलावा गांव में पहुंचने वाले बगुलों पर भी टीम की नजर है।

    डॉक्टरों का कहना है कि एनसेफेलिटिस की वायरस मानव के साथ पक्षी और जानवरों से भी फैलते हैं। जिले के दूरस्थ ग्राम गदापाल तक एनसेफेलिटिस पहुंचने की वजह डॉक्टर खोज रहे हैं। पिछले चार दिनों से स्वास्थ्य कर्मियों का दल घर-घर जाकर बीमार लोगों की जानकारी ले रहे हैं।

    गुरुवार को भी टीम राउतपारा और नाकापारा के 39 लोगों का स्वास्थ्य जांच किया। इस दौरान सर्दी-खांसी के साथ चार मरीज मलेरिया के मिले है। इनमें दो पेल्सीफेरम और दो मिक्स मलेरिया है। टीम के मुताबिक गांव में अब तक 90 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण हो चुका है। इनमें 9 मरीज मलेरिया पीड़ित थे। जिनका उपचार चल रहा है।

    मानव के साथ पक्षी और सूअर में जीवन चक्र

    जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गौतम सिंह बताते हैं कि क्यूलेक्स मच्छर में एनसेफेलिटिस के वायरस होते हैं। यह अपना जीवन चक्र सूअर, बतख, बगुला में भी पूरा होता है। जापानी एनसेफेलिटिस वायरस पालतू सूअर और जंगली पक्षियों के रक्त प्रणाली में परिवर्धित होते हैं।

    जापानी एनसेफेलिटिस के वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। केवल पालतू सूअर और जंगली पक्षी ही जापानी एनसेफेलिटिस वायरस फैला सकते हैं। गदापाल में भी टीम सर्वे में इन बिंदुओं पर भी नजर रखी है। टीम जानने की कोशिश कर रही है कि पूर्व से संक्रमित क्षेत्र सुकमा, बीजापुर और ओडिशा के मलकानगिरी से ग्रामीणों का कोई संबंध तो नहीं है। या गांव में उस इलाके के पालतु मवेशी-पक्षी लाए गए हों।

    सूअर का मांस सूखते मिला गांव में

    जापानी बुखार की मौत के बाद गांव में लगातार सर्वे कर रही टीम ने गुरुवार को नाकापारा के एक घर के सामने एक लंबे बांस के सहारे खपचियों पर सूअर मांस सूखता देखा। पूछताछ में घर मालिक ने बताया कि पालतू सूअर मर गया था, उसके आधे मांस को पकाया गया और आधे को सूखा रहे हैं। जिसका उपयोग बाद में किया जाएगा। टीम सदस्यों ने ग्रामीण को इससे संक्रमण और बीमारी की जानकारी देते नष्ट करने की समझाइश दी। सर्वे टीम के मुताबिक बरामद मांस को उन्होंने जमीन में दफन करवा दिया है।

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