जशपुरनगर। रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र का जशपुर जिला इन दिनों दो राज परिवारों के बीच चल रहे सियासी घमासान का मैदान बना हुआ है। पूर्ववर्ती सरगुजा रियासत के महाराज व स्वास्थ्य मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी को संसद की दहलीज तक पहुंचाने के लिए ताकत झोंक रहे हैं। तो भाजपा के 20 साल के अजेय इतिहास को बनाए रखने के लिए जशपुर रियासत का जूदेव परिवार प्रचार अभियान में उतर चुका है। इस सियासी संग्राम का नतीजा किसके पक्ष में रहता है,यह तो 23 मई को ही पता चल सकेगा। फ‍िलहाल मतदाता रियासतों के सियासी संघर्ष के दिलचस्प नजारा का मजा ले रहे हैं।

रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र का तीन विधानसभा क्षेत्र जशपुर जिले में हैं। तीनों क्षेत्रों से मिली बढ़त के बूते ही भाजपा पिछले 20 साल से लोकसभा क्षेत्र में कब्जा जमाए हुए हैं। विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा के 35 साल के जादुई तिलस्म को भेदने के बाद कांग्रेस 20 साल पुराने संसदीय इतिहास के पन्‍ने को बदलने का इरादा लेकर चुनावी रण में उतरी है। प्रचार अभियान में दोनों ही प्रतिद्वंद्वी दल इन दिनों ताकत झोंकते हुए हैं। स्टार प्रचारकों के ताबड़तोड़ सभाओं के बीच इस जिले में दो राजघरानों के बीच चल रहे खामोश सियासी संघर्ष की चर्चा चल रही है।

जशपुर जिले को पूर्ववर्ती रियासत के कुमार दिलीप सिंह जूदेव के नाम से जाना व पहचाना जाता है। इसे 35 साल तक अभेद गढ़ बनाएं रखने में स्व. जूदेव की अहम भूमिका रही है। अगस्त 2013 में उनके निधन के बाद भाजपा की कमजोर होती बुनियाद ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को नए सिरे से जड़ जमाने का मौका दिया है।

नतीजा भाजपा ने सबसे पहले 2015 में नगर निकाय के चुनावों में जशपुर के साथ पत्थलगांव, बगीचा, कोतबा नगर पालिका, नगर पंचायत में शिकस्त का सामना किया। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में जिले के तीनों सीट जशपुर, कुनकुरी और पत्थलगांव भाजपा के हाथों से पिुसल गए।

अब लोकसभा चुनाव में पार्टी की प्रतिष्ठा दांव में लगी हुई है। जिले में खोई हुई भाजपा की जमीन को वापस पाने के लिए इस बार भी कमान जशपुर राजपरिवार ने ही संभाल रखा। लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ से भाजपा की प्रत्याशी श्रीमती गोमती साय को टिकट दिलाने में पूर्व विधायक युद्ववीर सिंह जूदेव की भूमिका अहम मानी जा रही है। चुनावी नतीजे को उन्होनें अपने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। रायगढ़ से लेकर जशपुर तक सियासी समीकरण को सुधारने में जुटे हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर सरगुजा के महाराज कहलाने वाले टीएस सिंहदेव ने कांग्रेस की ओर से प्रचार की कमान संभाल रखा है। उन्होनें तीन चुनावी सभा लेकर इस किवदंती को तोड़ने का प्रयास किया है कि वे जशपुर जिले की सियासत में दखल देने से गुरेज करते हैं।

इस सियासी संग्राम में टीएस सिंहदेव के निशाने पर भाजपा का 20 साल के इतिहास को बदलना है, वहीं युद्ववीर सिंह जूदेव अपने पिता के सियासी विरासत को बचाए रखने के लिए जूझ रहे हैं। आमसभा चुनाव का परिणाम इस बार इन दोनों ही राजपरिवारों के सियासत का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।