जशपुरनगर, रायगढ़ । दशहरा उत्सव जशपुर रियासत के साथ जनजातीय पंरपरा का अनूठा संगम है। अपने समृद्ध परंपरा और विशेष पूजा पद्धति से यहां के दशहरा महोत्सव को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है। जिलेवासियों के लिए जशपुर दशहरा एक महा उत्सव है, जिसे राज परिवार के पिछले 27 पीढ़ी से उसी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

महोत्सव का शुभारंभ यहां के सबसे पवित्र स्थल पक्कीडाड़ी से प्रारंभ होता है मान्यता अनुसार जिले की सत्ता को संचालित करने वाले देवस्थल बालाजी मंदिर व काली मंदिर से अस्त्र-शस्त्रों को लाकर पूजा की जाती है।

एक झांकी के रूप में राजपरिवार के सदस्य और जिले के पुरोहित यहां विशेष पूजा अर्चना करते हैं। राजपुरोहित आचार्य विनोद मिश्रा के अनुसार शक्ति की उपासना इस पूजा में होती है, जहां मां काली को काले रंग के बकरे की बली चढ़ाई जाती है।

पक्कीडाड़ी से पवित्र जल बाजे गाजे के साथ देवी मंदिर मे लाया जाता है, जहां कलश स्थापना कर अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है। इसी के साथ नियमित रूप से 21 आचार्यों के मार्गदर्शन में राज परिवार के सदस्य सहित नगर व ग्रामों से आए श्रद्वालु मां दुर्गा की उपासना वैदिक, राजसी और तांत्रिक विधि से करते हैं।