जशपुरनगर। सन 1973 में उत्तराखंड में ठेकेदारों द्वारा जंगलों की कटाई के विरोध में पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एक बड़ा आंदोलन चलाया था। जब ठेकेदार के आदमी पेड़ों को काटने के लिए जंगलों में पहुंचे तो गांव के लोग पेड़ों से चिपक गए। इस आंदोलन को चिपको आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन ने पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

आज के दौर में भी वनों की अवैध कटाई जारी है। ऐसे में जशपुरनगर क्षेत्र के जंगल में एक नजारा दिखा जिसने चिपको आंदोलन की याद ताजा कर दी। ग्राम चिकपाठ में जागरूकता कार्यक्रम, गोष्टी के बाद ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला, पुरुष और बच्चे चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से लिपट गए।

पर्यावरण जागरुकता को लेकर संवेदना समूह के द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। गोष्ठी में ग्रामीणों को जंगल के महत्व की जानकारी दी गई। इसके बाद सभा स्थल से उठकर ग्रामीण आसपास के पेड़ों से लिपट गए व हाथ रखकर संकल्प लिया कि वे अपने जीते जी हरे पेड़ों को कभी नहीं काटेंगे।

कार्यक्रम को सामाजिक कार्यकर्ता राम प्रकाश पांडे, आनंद जैन, विकास प्रधान, राज कपूर भगत ने भी संबोधित किया। गांव के बुजुर्गों ने भी कार्यक्रम को संबोधित कर इस संकल्प के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने निर्णय लिया की वे अब जंगल से सूखी लकड़ी वह पत्ते ही लाएंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे जंगल में कुल्हाड़ी लेकर प्रवेश नहीं करेंगे, ना ही किसी आसपास के ग्राम के ग्रामीणों को ही जंगल में प्रवेश करने देंगे। यहां यह निर्णय लिया गया कि इस आंदोलन को आसपास के पंचायतों में भी चलाया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों ने वृक्षारोपण का भी संकल्प लिया।