कांकेर, नईदुनिया प्रतिनिधि। चारों तरफ पहाड़ियों से घिरे ग्राम बासकुंड के ऊपरतोनका गांव के चलाचुर में मच्छरदानी वितरण करने दो सदस्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता दो पहाड़ी पार करते हुए 12 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे। यह इलाका पहाड़ियों के बीच होने से विकास की कई योजनाएं ग्राम चलाचुर तक नहीं पहुंच पाती। बावजूद स्वास्थ्य कर्मी यहां अक्सर पहुंचकर ग्रामीणों को अपनी सेवाएं देते रहते हैं।

स्वास्थ्य कार्यकर्ता गरिमा यादव और नाकेश नेताम अपने कंधे पर 6 घर के 53 सदस्यों के लिए 12 किमी का पगडंडी तय कर दो पहाड़ियों को पार कर शुक्रवार को चलाचुर पहुंचे तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। यहां मच्छरों की संख्या अधिक होने से मलेरिया की शिकायत आते ही रहती है। ग्रामीणों को मच्छरों का प्रकोप और मलेरिया से बचाने के लिए दोनों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने पैदल छह किमी का सफर तय किया और ग्रामीणों को मच्छरदानी वितरण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी, और मौसमी बीमारियों से बचने पानी उबालकर पीने व गांव में स्वच्छता रखने कहा।

ग्रामीण सामरी बाई, दशनाथ शोरी, दीपचंद पोटाई, अतिबाई सलाम आदि ने बताया कि हमें मच्छरदानी मिला है। हम स्वास्थ्य विभाग और सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। क्योंकि विभाग के कर्मचारियों ने इतने अंदर आकर हमें मच्छरदानी दिया और मलेरिया से बचने का तरीका सिखाया। मच्छरदानी का उपयोग कर हम मलेरिया से बचने का प्रयास करेंगे। इस पूरे अभियान को सफल बनाने में मलेरिया इंस्पेक्टर जेआर साहू, मितानिन सुनीता शोरी, सामरी बाई, दशरू राम, दशनाथ शोरी, सगारु शोरी आदि ने भी सहयोग किया।

खतरनाक है बांसकुंड का सफर

यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मी यहां अक्सर खतरा उठाकर पैदल पहुंचते हैं। बांसकुड वहीं गांव है जहां विगत 18 दिसंबर को नरभक्षी तेंदुए ने एक महिला को दिनदहाड़े मारकर खा लिया था। जंगली जानवरों का खतरा तो बना ही रहता है, यहां पैदल चलना भी बेहद कठिन है।

दोनों ने विभाग का बढ़ाया मान : पांडेय

चिकित्सक डॉ. नवीन पांडेय ने बताया कि ऊपरतोनका, बांसकुड और चलाचुर गांव तक पैदल पहुंचकर इन दोनों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने हमारे विभाग का मान बढ़ाया है। जहां पहले भी उल्टी दस्त और मलेरिया की शिकायत पर चिकित्सा शिविर लगाने मैं खुद भी कई बार गया हूं। यहां जाने के लिए पैदल के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कई जगह रास्ता इतना कठिन है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।