कोरर। नईदुनिया न्यूज

कोरर के निकट ग्राम पंचायत कनेचूर के आश्रित ग्राम जामपारा के श्रमिक तीन साल से नरेगा में किए काम की मजदूरी के लिए भटक रहे हैं। मंगलवार को कोरर पहुंचे इन श्रमिकों ने बताया कि नरेगा के तहत तीन वर्ष पूर्व ग्राम जामपारा में वर्ष 2015 में भूमि समतलीकरण का कार्य कराया गया था। गांव के हितग्राही रामो रावटे, पवन साहू के खेत में ग्राम पंचायत एजेंसी के तहत काम किया। इसी तरह तालाब गहरकरण का कार्य के तहत मनसा राम माधिया, मन्नू राम मारगिया तथा शौचालय निर्माण आदि के कार्यों का भी सैकड़ों मजदूरों का भुगतान राशि लगभग सात लाख रुपये नहीं मिल पाया है। जिसके चलते दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आज भी जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर गए थे। नाराज श्रमिकों ने बताया कि हमारी मजदूरी का आधा पैसा तो जगह-जगह मिन्नत करने में, आवागमन करने में खर्च हो जा रहा है। जनपद कार्यालय में मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी सिन्हा से मिले तो जवाब मिला कि सभी मजदूरों के भुगतान की राशि पोस्ट आफिस कोरर में भेजा जा चुका है। उसी समय सभी मजदूर वापस आकर पोस्ट आफिस कोरर में संपर्क किया गया तो पता चला कि वहां खाता में पैसा नहीं आया है। इस बात को लेकर मजदूरों में पंचायतों के अधिकारियों व प्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। शीघ्र ही मजदूरी दिलाने की मांग की है।

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