कांकेर (ब्यूरो)। एक लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली सुनीता उर्फ हुंगी कट्टम ने पांच दिन के नवजात के साथ आत्मसमर्पण किया है। बच्चे का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने और कम वजन के कारण दोनों को अंतागढ़ अस्पताल में भर्ती कर पुलिस उनकी देखभाल कर रही है।

एसपी केएल ध्रुव ने बताया कि 12 मई को जिला पुलिस व एसटीएफ की संयुक्त टीम सर्चिंग पर निकली थी। इस दौरान सूचना मिली कि एक गर्भवती महिला नक्सली को संगठन के लोगों ने कोयलीबेड़ा थाना के ग्राम चिलपरस में छोड़ दिया है। पांच दिन पहले ही उसने नवजात को जन्म दिया है। इस आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची। उसे समझाया। समर्पण के लिए तैयार किया। इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों को अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को कांकेर जिला अस्पताल लाया गया है।

एसपी ध्रुव ने बताया कि सुनीता उर्फ हुंगी कट्टम वर्ष 2014 में संगठन में भर्ती हुई थी। 2014 से 2015 तक बासागुड़ा एलओएस सदस्य रहकर काम किया। अप्रैल 2015 में दक्षिण बस्तर से उत्तर बस्तर डिवीजन क्षेत्र में भेज दी गई। तब से अब तक उत्तर बस्तर डिवीजन के कुंएमारी एलओएस सदस्य रहकर काम कर रही थी। वहां उसे सुनीता के नाम से जाना जाता था। वह अपने साथ 12 बोर की बंदूक रखती थी। सुनीता ने 2018 में किसकोड़ो एरिया कमेटी अंतर्गत प्लाटून नं. 17 के सदस्य व सुकमा निवासी मुन्ना मंडावी से शादी की थी। गर्भ ठहरने के आठ महीने बाद उसे चिलपरस में छोड़ दिया गया था। पुलिस ने शासन की योजना के तहत प्रोत्साहन स्वरूप उसे 10 हजार रुपये की राशि दी है।

मुठभेड़ में शामिल रही

सुनीता 11 मार्च 2018 को ताड़ोकी क्षेत्र के मसपुर जंगल में हुई मुठभेड़ में शामिल थी। इस में बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट गजेंद्र सिंह व आरक्षक अमरेश कुमार शहीद हुए थे।