कमल जायसवाल, बड़गांव/कांकेर। भारी गरीबी के बीच भी यदि मन में पढ़ने कुछ कर गुजरने की व आगे बढ़ने की लालसा हो तो कोई प्रेम नगर के 14 वर्षीय दिव्यांग बच्चे जगन्नाथ देवनाथ से सीखे। बेहद गरीब घर में जन्म लेने वाला दोनों हाथों से लाचार जगन्नाथ लगातार आठवीं कक्षा तक अपने पैरों के दम पर ही पहुंच सका है।

हाथ ना होने से वह पैरों से लिखता है। घर का खर्चा पिता निताई देवनाथ मछली बेचकर घर का खर्चा चलाते हैं। पढ़ने के प्रति लगन की अनूठी मिसाल बड़गांव के निकट के गांव के इस बच्चे में देखने को मिली। वह जन्म से ही दोनों हाथों से विकलांग है।

वह सामान्य व्यक्तिओ की तुलना में अपने हाथों से कुछ करने में असक्षम है। उसके बावजूद जगन्नाथ ने आजतक हिम्मत नहीं हारी। अपने दोनों हाथों से लाचार होने के बावजूद वह अपनी पढ़ाई को जारी रखा हुआ है और संघर्षों की लड़ाई को अकेला लड़ता हुआ आज कक्षा आठवीं में अध्यनरत है।

पढ़ाई का स्तर भी अन्य छात्रों की तुलना में काफी बेहतर है। वह अपने दोनों हाथों से नहीं लिख पाने के कारण अपने पैरों के अंगूठा के सहारे लिखता-पढ़ता है। वहीं दोनों पैरों से विकलांग होने के कारण जगन्नाथ को अपने दैनिक कार्य को करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

कपड़े पहनने हो, शौच जाना हो जैसे तमाम दैनिक कार्यो में जगन्नाथ को अपनी मां या दूसरे की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। वहीं स्कूल में भी जगन्नाथ की कुछ कार्यों को करने के लिए उसके सहपाठी भी काफी सहायता करते हैं। जगन्नाथ के पिता निताई देवनाथ घर की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए बाजार में मछली बेचने के कार्य करते है। ताकि घर की आवश्यकतओं की पूर्ति हो सके और जगन्नाथ की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए।


डॉक्टर बनना चाहता जगन्नाथ

जगन्नाथ देवनाथ को अपने दोनों हाथों से अपंग होने का बिल्कुल भी मलाल नहीं है। मुश्किलों से जूझते हुए वह अपने भविष्य को संवारने में जुटा हुआ है। वह आगे पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहता है।

पढ़ने में मेहनती - मनमथ प्राचार्य

प्रेमनगर मीडिल स्कूल के प्राचार्य मनमथ दत्त ने बताया कि जगन्नाथ को पढ़ने में गहरी रूचि है। उसके मन में कोई हीन भावना नहीं है। सभी के बराबर लगन से पढ़ता है और यदि पढ़ता रहा तो निश्चित तौर पर आगे बढ़ जाएगा।