करगीरोड- कोटा। नईदुनिया न्यूज

कोटा विकासखंड के ग्राम डिंडौल,नर्मदा में विकासशील फाउंडेशन द्वारा कीस्टोन फाउंडेशन एवं प्रेरक समिति के सहयोग से सीएफआरआईएफआर पर ग्राम स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया गया। इस अवसर पर कानून की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रकृति सेवा संस्थान बिलासपुर के अध्यक्ष डॉ, राजीव अवस्थी, कार्यक्रम की अध्यक्षता लक्ष्मीकुमार जायसवाल मुख्य रूप से उपस्थित रहे। महिलाओं एवं ग्रामीण बुजुर्गों को डॉ. अवस्थी ने वन अधिकार अधिनियम पर फोकस करते हुए व्यक्तिगत दावा के बारे में बताया कि नियम 11 -1, क के तहत वनग्रामों में रहने वाले विशेष पिछड़े आदिवासी एवं गैर परंपरागत आदिवासी लोगों को आवास एवं कृषि कार्य के लिए अधिनियम 2006 ,2012 के तहत वन अधिकार प्राप्त है,दावा प्रपत्र में भरने के पूर्व आवश्यक दस्तावेज पर जानकारी दिया गया साथ ही ग्राम की विकास को लेकर महिलाओं को जल, जंगल, जमीन विलुप्त हो रहे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए ग्राम की महिलाओं को संगठित होकर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। इससे काफी हद तक पर्यावरण नुकसान को रोका जा सकता है। सभी उपस्थित ग्रामीणों को जंगल से से प्राप्त रोजगार के साधन महुआ,तेंदूपत्ता,लाख,गोंद ,जड़ी बूटी ,बीज अन्य उपयोगी चीजें को पुनः वापस अपने निजी उपयोग में लाकर व उसे समूह के माध्यम से बाजारों में संग्रहित कर रोजगार के साधन को अपना सकते हैं। उन्होंने बताया कि समुदायिक अधिकार धारा 3-1, ख,ट के तहत गांव में परंपरागत सीमा में या उसके बाहर सामुदायिक अधिकार व आवास का अधिकार को लेकर आदिम जनजाति के समूहों के व कृषि पूर्व समुदायों के आवास के अधिकार 3-1,ड़ के तहत जानकारी दिया गया ।कार्यक्रम में पार्वती मितानीन, गोदावरी, रामेश्वरी,अनिता ,श्यामा बाई, प्रेमाबाई, उमादेवी,मंजू वैष्णव, ममता राजपूत,राधा श्रीवास,कांति बाई, धनुष राजपूत,कृष्ण कुमार रजक,सुरेंद्र गोंड़,अशोक श्रीवास, राम स्वरूप कौशिक,सुन्दर सिंह यादव,सियाराम आदि ग्रामीण जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन फील्ड कार्यकर्ता अमरिका प्रसाद साहू एव आभार प्रदर्शन संस्था के कार्यकर्ता ओंकारेश्वर शर्मा ने किया।