कुंडा। नईदुनिया न्यूज

समीपस्थ ग्राम भरेवापूरन में विगत सात फरवरी से बैकुंठवासी सुंदरलाल चंद्राकर के वार्षिक श्राद्घ पर आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण के कथा में अष्टमदिवस कथा व्यास पंडित धु्रव शर्मा दर्शनाचार्य स्वामी श्री करपात्री जी महाराज के कृपापात्र शिष्य ने बताया कि गोपियों का एकात्मा भाव होना ही रास है। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि जैसे खेतों में धान भले ही अलग-अलग दिखाई दे, भले ही अलग-अलग किस्म का हो, लेकिन जब उस धान को किसान काटकर खलिहान में इकट्ठा करता है, तो उसे हम रास कहते हैं। और उस रास से किसी धान को या धान के पौधे को अलग कर पहचान पाना कठिन कार्य ही नहीं अपितु असंभव है यही रास है। यजमान चंद्रिका बाई चंद्राकर, प्रभात चंद्राकर, मुन्नाी बाई चंद्राकर, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी भानुप्रताप चंद्राकर, प्रियंका चंद्राकर के यहां श्रीमद् भागवत महापुराण के आयोजन एक किसान द्वारा एवं किसानों के लिए और कृषि से किया गया है। इसलिए कथा व्यास पंडित ध्रुव शर्मा बखूबी ढूंढ कर कोशिश करते हैं कि प्रत्येक उदाहरण कृषि से संबंधित हो इसलिए उन्होंने रास का समन्वय खलिहान में इकट्ठा किए गए। धान रूपी रास से किया। उन्होंने बताया कि एकात्मकता की भावना से भरे भाव गोपी है और जो गोपी है। वहीं भगवान कृष्ण है, कृष्ण से अपने आप को बिलग नहीं कर पाना ही रास है। यह कथा आठ फरवरी बुधवार को कथाव्यास श्री सुदामा चरित एवं हंसाख्यांन का व्याख्यान किया। इस आयोजन में प्ररायनकर्ता पंडित विनोद शास्त्री हैं। विगत दिनों श्रोता के रूप में मोतीराम चंद्रवंशी पूर्व विधायक पंडरिया, नंदलाल चंद्राकर अध्यक्ष कुर्मी समाज कबीरधाम, यशवंत चंद्राकर अध्यक्ष चंद्राकर कल्याण युवा समिति कबीरधाम, नकुल सिंह ठाकुर, रामस्वरूप साहू, राज कुमार चंद्राकर दुलापुर, मुकेश ठाकुर, अवनीश जायसवाल सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी, तुलस चंद्राकर, विष्णु चंद्राकर संकुल प्रभारी, कलीराम चंद्राकर प्रधान पाठक, भागीरथी चंद्राकर संकुल प्रभारी, प्रांजल ठाकुर कोयलारी, वासुदेव चंद्राकर, हथमुंडी, लालाराम साहू आदि लोग उपस्थित रहे।