कवर्धा। नईदुनिया न्यूज

जिले के वनांचल क्षेत्रो में बहुत से ग्रामों के नाम पानी के उपर से तो आते है, लेकिन यहां पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ता है। पिछले वर्षो में देखे तो पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों ने खुद मेहनत कर एक कुआं ही खोद डाला। उनकी मेहनत तो साकार रही, लेकिन आज भी पानी के नाम से जाने, जाने वाले ग्राम पानी के लिए मोहताज नजर आ रहे है। इन क्षेत्रों में पहुंचने के बाद पता चलता है कि बिन पानी सब सुन इस ग्राम में चरितार्थ होता नजर आ रहा है।

कई जगह तो ऐसी स्थिति है कि लोग पानी की आस लिये घंटों बैठे रहते है। तब कहीं जाकर उन्हें पीने के लिए पानी मिल पाता है। कहने के लिए तो अनेक योजनाएं है पर वनांचल में इन योजनाओं की तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। वनांचल के इन इलाकों मे साल दरसाल पानी की किल्लत विकराल रूप ले रही है। कही कुआं में उतरकर तो कहीं झिरिया में पानी ढूंढने की कवायद चल रही है। कुल मिलाकर पानी को लेकर वनांचलवासी अब ज्यादा परेशान हो रहे है। समय रहते पानी की समस्या की कारगार योजना के अभाव के चलते गर्मी के मौसम में पानी के लिए मारामारी चल रही है। इसी को लेकर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के लिए वनांचलवासियों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। तेलियापानी, महिडबरा, कांदावानी पंचायत में लंबे समय से पानी की किल्लत बनी हुई है। पहाड़ियों और जंगलों के बीच बसे गांवों में मूलभूत सुविधा अभी तक नदारद है। वनांचल इलाकों में साल दरसाल पानी की किल्लत विकराल रूप ले रही है। कही कुआं में उतरकर तो कहीं झिरिया में पानी ढूंढने की कवायद चल रही है। कुल मिलाकर पानी को लेकर वनांचलवासी अब ज्यादा परेशान हो रहे है। समय रहते पानी की समस्या की कारगार योजना के अभाव के चलते गर्मी के मौसम में पानी के लिए मारामारी चल रही है। तेलियापानी, महिडबरा, कांदावानी पंचायत में लंबे समय से पानी की किल्लत बनी हुई है। पहाड़ियों और जंगलों के बीच बसे गांवों में मूलभूत सुविधा अभी तक नदारद है। वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे है। पानी के अभाव के कारण ग्रामीणों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार द्वारा गांव-गांव में मूलभूत सुविधा देने का वादा साकार साबित नहीं हो रहा है। पंडरिया ब्लॉक के अंतिम छोर में बसे वनांचल के दर्जनों से ज्यादा गांव के ग्रामीणों को विगत कई माह से पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। पानी के अभाव में वनांचलवासियों को दो किमी आवागमन कर झिरिया का पानी लाकर उपयोग करना पड़ रहा है। वहीं गांव में लगे सौर ऊर्जा से संचालित हैंडपंप ने भी दम तोड़ दिया है। लगभग एक घंटे में एक मटका पानी भरता है। जिससे परेशानी बढ़ जाती है। छत्तीसगढ पृथक होने के बाद विकास की गति बढ़ी है, लेकिन सीमाओं का दूरस्थ गांव आज भी विकास की गाथा से वंचित नजर आ रहा है। आम आदमी की जरूरत सड़क, बिजली, पानी व स्वास्थ्य सेवा प्रमुख होती है और यह भी ना मिले तो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक को लाभ मिलना कहा जाना अनुचित होगा। इन वनांचल ग्रामों में कांदावानी, तेलियापानी, महिडबरा जो पंडरिया ब्लॉक के अंतिम सीमा में है। यहां के ग्रामीण वर्षो से निवास कर रहे है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। गांव में विगत कई महीनों से पानी के लिए ग्रामवासी तरस रहे है। मजबूरी में एक से दो किमी दूर जाकर झिरिया को साफ कर पानी लाते है और उसी पानी को गाय और जानवर भी पीते है। ऐसे में पेयजल पीने लायक कहा तक रहेगा सोचनीय विषय है। विकासखंड पंडरिया के करीब 26 ग्राम पंचायत 50 गांव 60 पारा के लगभग 1533 परिवार से औसत पांच परिवार प्रति परिवार की दर से 7660 लोग झिरिया ढोंढी एवं नाला का पानी पीने विवश है।

हैण्डपंप के कंठ सूखे

गांव में पानी की समस्या ना हो इसलिए हैंडपंप लगाया गया है, लेकिन तेज धार में पानी निकलने की आस को लेकर सुबह से महिलाएं अपने बर्तनों को रख देते है। लेकिन घंटों बाद भी एक मटकी पानी भी नहीं भर पाता। ऐसे में मजबूरी में झिरिया का पानी लेने जाना पड़ता है। लोग अपनी सुविधानुसार साइकिल व कांवर से पानी लाते है।