पंडरिया, कर्वधा । पंडरिया ब्लॉक के पीपरटोला गांव में शिक्षा के प्रति एक शिक्षक फूलसिंग मरावी की ललक इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा विभाग ने यहां स्कूल नहीं होने के कारण नए स्कूल भवन बनाने के लिए निर्देश दिया था, लेकिन एक तिहाई पैसा भी जारी नहीं हो पाया। स्कूल आधा-अधूरा ही बन पाया है।

ऐसे में वहां पढ़ रहे बैगा बच्चों का दर्द महसूस करते हुए खुद ही बैंक से दो लाख 44 हजार रुपये लोन लेकर स्कूल भवन को पूरा कराया। अब बच्चे वहां अपने भविष्य गढ़ने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग से बार-बार पैसे के लिए अब चक्कर लगाना पड़ रहा है। उसके बावजूद भी शिक्षक को भुगतान नहीं किया जा रहा है।

शिक्षा के प्रति ऐसा जुनून और जज्बा कभी-कभी ही देखने को मिलता है। जहां शिक्षक छात्रों को लेकर इतने चिंतित रहता है कि अपना ही पैसा लगाकर सरकारी भवन बना दिया हो ऐसा ही एक मामला पंडरिया ब्लॉक सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत अमानिया के आश्रित गांव पीपरटोला से सामने आया है।

जहां शिक्षक ने लोन लेकर अधूरे निर्माण कार्य को पूरा तो करा दिया लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षक जब शिक्षा विभाग के पास पैसे के लिए पहुंचा तो उन्होंने हाथ खड़ा करते हुए इसे आरईएस के मत्थे जड़ दिया। तब से शिक्षक दर-दर भटक रहा है।

दो विभाग के बीच पीस रहा शिक्षक

आर्थिक समस्या से जूझ रहे शिक्षक जब पैसा पाने के लिए शिक्षा विभाग के पास पहुंचता है तब शिक्षा विभाग इसे आरईएस की जिम्मेदारी बताता है। वहीं आरईएस के अधिकारी के पास भी कई बहाने हैं जहां वे वेरीफिकेशन की बात कहते हुए ठंडे बॉक्स में डाल देते हैं।

बैगा के घर में लगता था स्कूल

पूर्व में स्कूल नहीं होने के कारण शिक्षकों द्वारा गांव के ही बैगा के घर का उपयोग बच्चों का भविष्य संवारने में करते थे। इस दौरान अनेक परेशानियां होती थी। इसी परेशानी को दूर करते हुए नए भवन की स्वीकृति प्रदान की गई।

स्वीकृत हुआ चार लाख, मिला 91 हजार

शाला समिति अध्यक्ष सोनूराम और शिक्षक फूलसिंग मरावी किसी भी तरह से भवन निर्माण के लिए राशि मिल जाएगा यह सोचकर व्यापारियों से सीमेंट, रेत व अन्य सामग्री उधारी में ले लिया और अधूरे भवन को पूरा करने में लग गए लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी दो लाख की राशि नहीं मिल पाई और कर्जदारों के तगादा से परेशान होकर शिक्षक फूलसिंग मेरावी बैंक से कर्जा लिया। इस पर ग्रामीण रतन सिंग, भड्डू राम, सोनुराम सहित अन्य ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी, शिक्षा विभाग, आरईएस में बकाया राशि को देने के लिए आवेदन भी किया, लेकिन इसकी सुध किसी ने नहीं ली।

गत वर्ष शिक्षा की इस परेशानी को लोगों ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद विभाग हरकत में आया और तीन लाख 16 हजार की स्वीकृति प्रदान की। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय ने पीपरटोला का निरीक्षण कर कहा कि आरईएस विभाग द्वारा यह भवन बनाया जाएगा और यहां के शिक्षा समिति को भवन निर्माण कार्य करने के लिए 91 हजार राशि दिया गया। इसके बाद वे आश्वस्त हो गए कि जल्द ही भवन बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

पैसे के लिए पड़े लाले

विभाग से राशि स्वीकृत होने के बाद शिक्षक को यह लगने लगा कि देर सबेर विभाग से बची हुई राशि तो मिल ही जाएगी। लेकिन भवन नहीं होने का खामियाजा बच्चों को क्यों भुगतना पड़े यह चिंता शिक्षक फूलसिंह मेरावी को सताने लगी और उसने बैंक से लोन निकालकर अधूरा निर्माण पूरा करने की ठान ली और इस तरह वे भारतीय स्टेट बैंक से दो लाख 44 हजार रुपये लोन ले लिया और प्रतिमाह एसबीआइ के खाते से छह हजार रुपये कटने लगा।

जब भवन पूर्ण रूप से तैयार हो गया और और उसे आर्थिक तंगी सताने लगी, तब वह विभाग के पास पहुंचा, लेकिन विभाग ने पैसे देने में आनाकानी कर रहा है। नतीजा यह हुआ कि वेतन मिलने के बाद भी शिक्षक को पैसे के लाले पड़ने लगा है।

'स्कूल निर्माण पूर्ण हो चुका है। इसकी जानकरी मिली है, लेकिन कुछ कारण से राशि जारी नहीं हो पाई है। सोमवार को साहब के साथ वहां जाकर देखेंगे और जल्द राशि जारी होगी।' - राजेश डड़सेना, इंजीनियर

- 'पीपरटोला में स्कूल भवन निर्माण को शिक्षक व समिति के सदस्यों ने मिलकर पूरा किया है। इसकी जानकारी नहीं है। राशि सर्व शिक्षा अभियान ही जारी करता है। आरईएस केवल उसकी रिपोर्ट तैयार कर देती है। इसके आधार पर जारी होता है। एक बार भवन निर्माण को देखना है। -प्रेम ठाकरे, एसडीओ आरईएस पंडरिया