कोरबा। किसी ने सच ही कहा है, कि हुनर को सिर्फ मौके की जरूरत होती है। एक वक्त में दबी-कुचली जिंदगी बसर कर बेसहारा कही जाने वाली बालिकाओं ने भी वही मौका पाकर खुद को साबित कर दिखाया। आश्रय गृह में संघर्ष कर जीवन में एक अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटी जिले की इन बेटियों ने राष्ट्रीय स्पर्धा में पांच गोल्ड व एक सिल्वर समेत छह मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ के लिए उपविजेता का खिताब हासिल किया।

एक और खास बात यह रही, कि छह बार की विश्व विजेता रही भारत की स्टार बॉक्सर एमसी मेरीकॉम व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने मेडल पहनाकर उनकी सफलता की खुशी दोगुनी कर दी।

केंद्र शासन की ओर से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले जरूरतमंद बालक-बालिकाओं की प्रतिभा में निखार लाने पिछले दो साल से हौसला नामक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही। पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित हौसला-2018 में बालिका गृह की बालिकाओं ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन ने छत्तीसगढ़ को अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान दिलाया।

हौसला कार्यक्रम में जिला व राज्य स्तर पर हुई प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों को राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भाग लेने का अवसर मिलता है। वर्ष 2018 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से कुल 18 राज्यों से आई बाल देखरेख संस्थाओं की ओर से बच्चों ने हिस्सा लिया।

खेलों से संबंधित अलग-अलग आयु वर्ग के इवेंट में छत्तीसगढ़ के बालक-बालिकाओं ने नौ गोल्ड, चार सिल्वर व चार ब्रांज मेडल जीते और प्रदेश को उपविजेता का खिताब दिलाया। खास बात यह रही कि छत्तीसगढ़ की टीम में शामिल सुमति सामुदायिक संस्था की ओर से संचालित बालिका गृह कोरबा की बालिकाओं ने पांच गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीता है। इस तरह इस अखिल भारतीय स्पर्धा में प्रदेश को दूसरा स्थान दिलाने सर्वाधिक मेडल लाने वाली जिले की बालिकाओं का योगदान अहम रहा। इस प्रतियोगिता में ओडिशा की टीम पहले स्थान पर रही।

हासिल किया बेस्ट एथलीट का तमगा

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जिले व छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाली आश्रय गृह की बालिकाओं ने कुल छह स्पोर्ट्स इवेंट में पदक जीते। इनमें 100 मीटर दौड़, 200 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बूते एक बालिका ने सर्वश्रेष्ठ एथलीट का खिताब भी अपने नाम लिखाया।

एक बालिका खिलाड़ी ने अंडर-16 वर्ष आयु वर्ग से भाग लेते हुए 100 मीटर की दौड़ में सिल्वर मेडल जीतकर उपविजेता का स्थान प्राप्त किया है। बालिकाओं की इस सफलता से बाल देखरेख संस्थाओं, बाल कल्याण समिति व महिला एवं बाल विकास विभाग में खुशी की लहर है।

अपनी एक पहचान बनाने का जुनून

वर्षों मुश्किल दशा में रहीं और अब जीवन के कठिन संघर्ष से जूझकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश रंग लाई और उन्होंने अभावों के बीच भी अपना वजूद कायम करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर कोरबा व छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। अपने प्रदर्शन से उन्होंने साबित कर दिया है कि वे भी किसी से कम नहीं।

बालिका गृह में आने वाली अधिकांश बालिकाएं साक्षर नहीं थीं, जिनके लिए प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था करते हुए स्कूलों में दाखिला कराया गया। आत्मरक्षा की महति जरूरत को देखते हुए गृह में ही उनके लिए कराते प्रशिक्षण की नियमित कक्षाएं भी लगाई जा रहीं, जिसमें भी यहां की बालिकाओं ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया है।

रोजगारमूलक कार्यों में भी हो रही प्रशिक्षित

बालिका गृह कोरबा में रह रही बालिकाओं ने साधारण प्रशिक्षण से जिस तरह प्रदर्शन प्रस्तुत कर सफलता हासिल की है, उससे उन्होंने साबित कर दिया है कि जरा सा प्रोत्साहन उन्हें उनके मुकाम तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

अच्छे प्रदर्शन के जरिए यहां की बालिकाओं ने पूर्व में भी जिले को गौरवान्वित किया है और ताइक्वांडो समेत अन्य खेलों में अनेक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की। खेलों के अलावा गृह की बालिकाओं के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से निपुण बनाने समय-समय पर प्रयास जारी रहे हैं। इसी तरह रोजगारमूलक शिक्षा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त करने उनके लिए सिलाई-कढ़ाई व ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा।