देवेन्द्र गुप्ता, पाली-तानाखार। कोरबा जिले की पाली-तानाखार विधानसभा को गोंड़ आदिवासियों का गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र की 30 फीसद आबादी फ्लोराइड की समस्या से ग्रसित है। सैकड़ों लोगों की हड्डियां फ्लोराइड की वजह से टेढ़ी हो गई हैं। कई पीढ़ियां इस अभिशाप को झेल रही हैं। आज भी 13 ग्राम पंचायतों के 42 से अधिक गांवों के लोग प्राकृतिक जल स्रोत पर निर्भर हैं।

प्रशासन की ओर से जितने भी हैंडपंप इस क्षेत्र में लगाए गए, उनमें से फ्लोराइडयुक्त लाल दूषित पानी ही निकल रहा है। इससे निपटने के लिए करोड़ों रुपए आयरन रिमुअल फिल्टर प्लांट में खर्च किया गया, पर यह उपाय भी कारगार साबित नहीं हुआ। नलजल योजना की सबसे बड़ी बाधा फ्लोराइड युक्त पानी है। बांगो बांध के डुबान क्षेत्र से सीधे पानी लेने के लिए 24 करोड़ की लागत से फिल्टर प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई, पर इस योजना को आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

भूगोल- यह क्षेत्र सघन वन व पहाड़ से घिरा हुआ है। लगभग 70 फीसद इलाका वन विभाग के अंतर्गत है। विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं बिल्हा, बेलतरा, मरवाही, कटघोरा, कोटा विधानसभा से जुड़ी हुई हैं।

प्रशासन- क्षेत्र में पाली व पोड़ी ब्लाकके अंतर्गत 325 गांव शामिल हैं। सिर्फ एक नगर पंचायत पाली तथा दो जनपद पंचायत पाली व पोड़ी-उपरोड़ा हैं। तीन थाना बांगो, पाली तथा पसान, तीन पुलिस चौकी मोरगा, जटगा, कोरबी हैं। दो तहसील कार्यालय हैं।

शिक्षा- पाली में पिछले साल कॉलेज खोला गया। पोड़ी ब्लाक काफी बड़ा होने के बाद भी कोई कॉलेज नहीं खुल सका है। बतरा एवं पोड़ी के विद्यार्थियों को 45 किलोमीटर का सफर तय कर कटघोरा या पाली कॉलेज जाना पड़ता है।

आर्थिक- पिछले 14 साल से एसईसीएल की सरईपाली ओपनकास्ट खदान खोलने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक खदान शुरू नहीं हो सकी। चोटिया में बाल्को की कोयला खदान है, पर पिछले दो साल से बंद पड़ी हुई है। अधिकांश आबादी कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर है।

सड़क- घरचुआं से पेंड्रा तक सड़क की स्थिति खराब है। पीएमजीएसवाई के माध्यम से कई सड़क बनाई गई थी, पर मरम्मत के अभाव में सड़कें उखड़ चुकी हैं। क्षेत्र की जनता कई बार सड़क बनाने की मांग कर चुकी है, पर अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है।

स्वास्थ्य- पाली एवं पोड़ी उपरोड़ा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। एनएच 111 के समीप होने के बाद भी इन दोनों स्वास्थ्य केंद्रों में कोई सुविधा नहीं है। समय-समय पर एनएच में सड़क दुर्घटना होती रहती है और घायलों को उपचार के लिए बिलासपुर या कोरबा भेजना पड़ता है।

ये बन सकते हैं चुनावी मुद्दे

- पसान को ब्लाक बनाने की लंबित मांग

- पोड़ी-उपरोड़ा में महाविद्यालय स्थापना

- हाथी प्रभावित इलाके में गजराज परियोजना

- बांगो बां का पानी फिल्टर कर पाइप लाइन से आपूर्ति

पांच साल में यहां की बदली तस्वीर

- पाली में खुला कालेज- यहां के डेढ़ सौ विद्यार्थियों को 40 किलोमीटर दूर कटघोरा या 50 किलोमीटर दूर बिलासपुर कॉलेज जाना पड़ता था। पाली में ही एनटीपीसी के सीएसआर मद से आईटीआई प्रारंभ किया गया, जिसका लाभ स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवकों को मिल रहा।

- पसान से अलसरा ग्राम पंचायत तक पहुंच मार्ग- बिलासपुर के पेंड्रा से लगे इस ग्राम पंचायत तक पहुंचना बेहद कठिन था। पगडंडी होने की वजह से चारपहिया वाहन नहीं चल पाते थे। सड़क निर्माण होने के बाद राह आसान हुई है।

- मेरई नदी में पुल का निर्माण- बारिश के सीजन में एक दर्जन गांवों से संपर्क टूट जाता था। दस किलोमीटर अधिक सफर करना पड़ता था। पुल निर्माण से ग्रामीणों का आवागमन अब बाधित नहीं होता।

- पाली व सपलवा में हाईस्कूल का उन्नयन- पहले इस क्षेत्र के बच्चों को हाईस्कूल के बाद की पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी। 11वीं एवं 12वीं की पढ़ाई के लिए करीब दस किलोमीटर दूर गांव जाना पड़ता था।

- पाथा एवं कोडार जलाशय का निर्माण- इस क्षेत्र के किसानों का कृषि कार्य मानसून पर ही निर्भर था। जलाशय निर्माण के बाद सिंचाई की सुविधा मिल रही। पिपरिया, कटोरी, पोड़ी में जलाशय का काम चल रहा है।

प्रमुख समस्या

- जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर होने के बाद पसान को ब्लॉक का दर्जा नहीं मिल सका। क्षेत्र की जनता लंबे अरसे से मांग कर रही है।

- हसदेव नदी में बांगो बांध बना हुआ, पर इसका लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल रहा है। इसी तरह विधानसभा से लगा हुआ खूंटाघाट जलाशय है, पर इससे भी क्षेत्र की जनता वंचित है। सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।

- सर्वाधिक बिजली उत्पादन वाले कोरबा जिले की इस विधानसभा में निवासरत लोगों को 24 घंटे बिजली नहीं मिल पाती। बेलतरा, बिलासपुर, कोटा व अंबिकापुर जिले से बिजली आपूर्ति होती है। इससे लो-वोल्टेज की समस्या बनी रही है।

- पिछड़ा क्षेत्र होने की वजह होने की यहां बेरोजगारी की समस्या व्याप्त है। स्थानीय स्तर पर नौकरी के लिए उद्योग नहीं है। चोटिया खदान खुली भी तो कुछ भू-विस्थापितों को ही नौकरी मिल सकी।

सीएम की घोषणा अब तक पूरी नहीं

- तान नदी पर मानिकपुर के पास 1.50 करोड़ की लागत से एनीकट निर्माण किए जाने की घोषणा की गई थी। अभी तक वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से योजना अधर में लटकी हुई है।

- पोड़ी-उपरोड़ा में कॉलेज प्रारंभ किए जाने की मांग अधूरी। करीब चार साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था, उसके बाद प्रशासन ने अब तक इस दिशा में पहल नहीं की।

मेरे बोल...

विपक्ष का विधायक हूं इसलिए कई काम शासन-प्रशासन से दबाव पूर्वक कराना पड़ा। परिणाम स्वरूप 25 फीसद ही कार्य हो सका। पुुल-पुलिया बनाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया, पर सरकार ने राशि अब तक स्वीकृत नहीं की है। आदिवासी गांव को जोड़ने के लिए सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा, पर फंड के अभाव में काम रुका है।

अपनी कोशिश से जटगा में साइंस कॉलेज, पाली में आर्ट्स कॉलेज प्रारंभ कराया, मेरई नदी में पुल का निर्माण कराया। सेमरा से सलिगमार होते हुए पसान, कोरबी से सेनहा तक 58 करोड़ की लागत से सड़क, पसान से अलसरा ग्राम पंचायत जोड़ने सड़क का निर्माण कराया। पोड़ी ब्लाक के पाली तथा सपलवा हाईस्कूल का उन्‍नयन एवं बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया। पाथा, पोड़ीखुर्द, उड़वा, कटोरी में जलाशय डायवर्सन के लिए सर्वे का कार्य चल रहा है। - रामदयाल उइके, विधायक, पाली-तानाखार विधानसभा

- विधायक बनने के बाद से रामदयाल उइके केवल अपनी जेब भरने का काम कर रहे हैं। निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों पर दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा करने में ही मशगूल रहते हैं। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के गोंड़ आदिवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। हर मोर्चे पर विधायक उइके फेल रहे हैं। केवल विपक्ष में होने का रोना रोकर जनता की जवाबदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। हम भी विपक्ष में रहे, पर जनसुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष करते रहे और जनता को अधिकार दिलाया। उइके भला ऐसा क्यों नहीं कर सकते। कृषि योग्य एवं वन भूमि कम हो रही है। क्षेत्र में अकाल पड़ा, पीड़ित किसानों के लिए कोई उपाय नहीं किया गया। जटगा से करमा तक सड़क नहीं बन सकी है। यदि मैं विधायक रहता तो गरीब किसानों की रोजी-रोटी बचाने का कार्य करता।- -हीरासिंह मरकाम, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी प्रत्याशी 2013

मतदाताओं का गणित

कुल वोटर- 210896

महिला 104976

पुरुष 105920

पोलिंग बूथ- 296

भाजपा को खाता खुलने का इंतजार

1993 से अब तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। 1998 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हीरा सिंह ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद से राम दयाल उइके लगातार चुनाव जीत रहे हैं। उइके भाजपा के वही पूर्व विधायक हैं, जिन्होंने 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए मरवाही सीट छोड़ी थी।

कांग्रेस ने उइके को 2003 में पाली से पहली बार टिकट दिया। उइके ने करीब 20 हजार वोट से हीरासिंह को पटखनी दी। 2008 और 2013 में भी उइके और मरकाम का आमना- सामना हुआ। दोनों ही बार उइके चुनाव जीतने में सफल रहे। इन दोनों की लड़ाई में भाजपा इस सीट पर तीन नंबर की पार्टी बनकर रह गई है। 2013 में भाजपा प्रत्याशी श्यामलाल मरावी 33 हजार वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे।