कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

देसी शराब दुकान में सेल्समेन के पद पर कार्यरत एक दिव्यांग युवक पर झूठा आरोप लगाते हुए उसे कार्य से पृथक कर दिया गया था। कार्य से निकाले जाने के बाद दिव्याग युवक अपनी डिपाजिट राशि के लिए दर-दर भटक रहा है।

करतला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम उमरेली निवासी हेमंत खाण्डे दोनों पैर से विकलांग है। पत्नी और दो बच्चों की जिम्मेदारी उसके कंधों पर है। हेमंत ने बताया कि काम की तलाश में कलेक्ट्रेट आया था। कलेक्टर की अनुशंसा पर शासन द्वारा संचालित देशी शराब दुकान में मई 2017 से नौकरी कर रहा था। इसके लिए अमानत राशि के तौर पर प्राइम वन प्राइवेट लिमिटेड भोपाल की कंपनी में 20500 रूपए डीडी जमा किया था। चार माह कार्य करने के बाद जिला सुपरवाइजर सचिन जोगी ने यह कहते हुए कि आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर तिर्की ने गैर कानूनी कार्य करते हुए पकड़े जाने की बात कही है। इसलिए कार्य से निकाला जा रहा है। इस तरह झूठा आरोप लगाकर 8 अक्टूबर 2017 को कार्य से निकाल दिया गया। श्री खाण्डे ने बताया कि उसका एक माह का वेतन रोक दिया गया है। अमानत राशि वापस पाने के लिए पिछले दस माह से आबकारी विभाग का चक्कर लगा रहा है। उसने यह भी कहा कि अगर मुझे गैर कानूनी रूप से शराब विक्रय करते पकड़ा गया तो आबकारी इंस्पेक्टर ने कार्रवाई क्यों नही की? अब जिम्मेदार अधिकारी रकम वापस करने में आनाकानी कर रहे हैं। अधिकारी रकम वापस करने की बजाय प्राइम वन कंपनी का हवाला दे रहे हैं।

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