कोरबा। बच्चा चोर होने की अफवाह की वजह से एक भिक्षुक की हत्या कर दी गई। गांव में इस आस से भिक्षुक आया था कि उसे कुछ खाने को मिल जाएगा, पर संदेह से ग्रस्त तीन ग्रामीणों ने न केवल उसे बुरी तरह पीटा बल्कि कुल्हाड़ी से उस पर जानलेवा हमला कर मौत के घाट उतार दिए। इस घटना की भनक पुलिस को न लग सके, इसलिए शव को नाले के पास रेत में दबा दिए।

लेमरू थानांतर्गत ग्राम पेंड्रीडीह में 27 मई की शाम एक 45 साल का अज्ञात भूखा प्यासा भिक्षुक पहुंचा और गांव में रहने वाले छोटकाराम कोरवा पिता मोतीराम कोरवा के घर पास आकर बीरूराम कोरवा से भोजन मांगा। इसी दौरान गांव में रहने वाले मंतूराम कोरवा, विफिन कोरवा व कुंवरसाय कोरवा ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि इसे खाना मत दो, यह शक्ल से ही बच्चा चोर लग रहा है। ऐसे लोग गांव में आ जाते हैं और सहानुभूति बटोर कर बच्चा चोरी कर भाग जाते हैं।

यह कहते हुए तीनों ने भिक्षुक को पकड़कर गांव से 500 मीटर दूर पूजाटांगर नाला के पास ले गए। वहां पहले डंडे से उसकी जमकर पिटाई की गई और फिर कुल्हाड़ी से सिर व गले में वारकर उसकी हत्या कर दी। शव को नाले के पास गड्ढा खोदकर दबा दिया गया।

आरोपितों ने पूरी कोशिश की थी कि पुलिस को घटना की जानकारी न लगे, पर गुनाह छुपता नहीं। पुलिस तक बात पहुंच गई और घटनास्थल पहुंचकर पुलिस ने शव को गड्ढे से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ धारा 201, 302, 34, 341 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। भिक्षुक के बारे में पुलिस को अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस उसके परिजनों की तलाश कर रही है।

सात दिन बाद पिता-पुत्र ने खोला मुंह

यह घटना जगमोहन राम की आंखों के सामने हुआ। वह काफी भयभीत था। घर पहुंचकर उसने अपने पिता छोटकाराम को पूरे घटना की जानकारी दी। छोटकाराम भी मौके पर पहुंचा, लेकिन शव देखकर वह भी वापस लौट आया। करीब सात दिन तक पिता-पुत्र अपना मुंह बंद रखे, पर अंततः रविवार को इसकी सूचना लेमरू थाना पहुंचकर पुलिस को दी। हत्या की कहानी सुन पुलिस भी भौचक रह गई। दल-बल के साथ पुलिस गांव पहुंची और तीनों आरोपित मंतूराम, विफिन कोरवा व कुंवरसाय कोरवा को गिरफ्तार कर लिया।