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    अनोखा डस्टबिन : कचरा देख खुलेगा ढक्कन, भरने पर कहेगा खाली करो

    Published: Tue, 05 Dec 2017 10:36 PM (IST) | Updated: Thu, 07 Dec 2017 07:59 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    कोरबा। आईटी कॉलेज के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने एक ऐसा डस्टबिन बनाया है, जिसमें डिजिटल इंडिया व स्वच्छ भारत मिशन को फोकस किया गया है। इलेक्ट्रिल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए डस्टबिन को कुछ ऐसे तैयार किया गया है, जिसमें लगा सेंसर कचरा डालने वाले की आमद को भांप लेता है। 100 मिली सेकेंड के लिए ढक्कन खुद-ब-खुद खुलकर बंद हो जाता है।

    इतना ही नहीं, जैसे-जैसे डस्टबिन में कचरा भरता जाता है, उसमें लगा सेंसर उसका आंकलन भी करता रहता है। जैसे ही वह पूरी तरह भर जाता है, उससे जुड़े कंट्रोल रूम तक सिग्नल व मोबाइल एसएमएस भी पहुंच जाता है, ताकि सफाई कर्मी उसे आकर खाली कर सकें। छात्रों ने इस प्रोजेक्ट को डिजिटल डस्टबिन फॉर स्मार्ट इंडिया नाम दिया है।

    गांधी का चश्मा, बेटियों की आन और अमिताभ बच्चन के दरवाजा बंद अभियान से देश के प्रत्येक घर और व्यक्ति को स्वच्छता मिशन से जोड़ने प्रोत्साहित किया जा रहा। दूसरी ओर मनरेगा से लेकर बैंकिंग, बाजार में खरीदारी, सोसाइटी का राशन, रसोई गैस व डाक सेवा समेत विभिन्न् क्षेत्रों में डिजिटल प्रणाली पर जोर दिया जा रहा।

    इन दोनों कॉन्सेप्ट का संयुक्त प्रयोग करते हुए आईटी कॉलेज में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के चार विद्यार्थियों ने इस एक अनोखे डस्टबिन को तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट तैयार करने में उन्हें एक माह का वक्त और करीब 4 हजार रुपए खर्च करना पड़ा है।

    इसे उन्होंने डिजिटल डस्टबिन फॉर स्मार्ट इंडिया नाम दिया है। डिजिटल डस्टबिन की खासियत यह है कि कूड़ा फेंकने पास आने वाले व्यक्ति की आमद को भांपकर ढक्कन खुल जाता है। एक सेकेंड के 100वें हिस्से में ढक्कर खुलकर बंद हो जाएगा। डस्टबिन में कूड़ा जब पूरी तरह भर जाएगा, तो उसे खाली करने कंट्रोल रूम में सिग्नल पहुंच जाएगा और उसे कर्मी आकर खाली कर सकते हैं। इस प्रोजेक्ट को बनाने ईईई विभाग के लैब टेक्नीशियन गोपाल राठौर का सहयोग शामिल रहा।

    रोग का कारण बनती है बिखरी गंदगी

    डिजिटल डस्टबिन का यह प्रोजेक्ट तैयार करने वाले छात्र-छात्राओं में ईईई 7वें सेमेस्टर के छात्र गौरी नंदन त्रिपाठी, गौतम शर्मा, कमलकांत चंद्रा व छात्रा आकांक्षा महतो शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में हजारों-लाखों लोग प्रतिदिन कई टन कचरा फेंकते हैं, जिसका समुचित या यूं कहें कि उत्तम निपटारा एक पेचीदा मसला है। घर का कूड़ा-करकट डस्टबिन में पहुंच भी गया, तो उसका ढक्कन खुला होने के कारण गंदगी बाहर बिखरी पड़ी रहती है।

    यह एक महत्वपूर्ण समस्या है। यह गंदगी मच्छर-मक्खियों के साथ बीमारी के कीटाणुओं के पैदा होने का कारण बनती है। डब्बा खुला रहना क्षेत्र में पीलिया, मलेरिया व अन्य संक्रामक बीमारियों की वहज बनता है। यही वजह है जो कचरे के उत्तम निपटान की सुविधा बेहतर करने का उद्देश्य लेकर यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।

    मैनपावर, वक्त व सौर पैनल से ऊर्जा की बचत

    ईईई की एचओडी श्रीमती शिल्पा मेहतो ने कहा कि यह एक प्रतिरूप है, जिसे बनाने में जो खर्च आया है, उसे और बेहतर कर व्यावसायिक दृष्टिकोण लेकर तैयार किया जाए, तो उत्पादन मूल्य व निर्माण अवधि की बचत होगी। डस्टबिन भरते ही न केवल सिग्नल मिलेगा, बल्कि कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी कर वहां डस्टबिन के अंकित नंबर की बत्ती भी जलने लगेगी।

    इसके अलावा बेहतर कम्युनिकेशन के लिए अलार्म भी बजेगा और कर्मियों के मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट भी मिलेगा। इस डस्टबिन को अलग-अलग स्थानों पर स्थायी जगह बनाकर स्थापित किया जाए, तो उसमें सोलर पैनल से कनेक्टिविटी देकर ऊर्जा की बचत भी की जा सकती है। साधारण डस्टबिन की जगह आधुनिक तकनीक पर आधारित डिजिटल डस्टबिन का इस्तेमाल हो तो मैनपावर भी बचाया जा सकता है।

    बेहतर हो सकती है निगम की सफाई व्यवस्था

    डिजिटल डस्टबिन तैयार करने वाले छात्र-छात्राओं के गाइड टीचर व रजिस्ट्रार प्रणय राही ने बताया कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था में डस्टबिन महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसका हर वार्ड और उसके गली-मोहल्लों में इस्तेमाल होता है। अगर यह डस्टबिन डिजिटल प्रणाली से अपगे्रड कर दी जाए, तो स्वच्छता अभियान की गति में आदर्श बदलाव लाया जा सकता है।

    अक्सर यह देखा जाता है कि डस्टबिन के आसपास बिखरे कचरे व नियमित उठाव नहीं होने की वजह से लोग कूड़ा निर्धारित जगह पर डालने की बजाय बाहर ही फेंक देते हैं। डिजिटल डस्टबिन से संबंधित जोन के अधिकारी दफ्तर से बैठे-बैठे ही सतत मॉनिटरिंग कर नियमित उठाव व नियंत्रित कर सकते हैं।

    खास बिंदु

    0 डिजिटल डस्टबिन का ढक्कन खुद खुलेगा और बंद होगा ।

    0 कूड़ा पूरा भरते ही उसे खाली करने डस्टबिन से कर्मी तक सिग्नल जाएगा ।

    0 कंट्रोल रूम में डस्टबिन के लिए निर्धारित बत्ती जलेगी, अलार्म भी बजेगा ।

    0 डस्टबिन से सफाई कर्मी के मोबाइल नंबर पर एसएमएस अलर्ट भी चला जाएगा ।

    0 व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक इस्तेमाल कर वक्त व मैनपावर की बचत ।

    0 सोलर पैनल से कनेक्ट कर पारंपरिक ऊर्जा की बचत ।

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