पᆬोटोः 8 जानपी 3- समरसता भवन में लटक रहा ताला और उसके बाहर खाना खाते मरीज के परिजन

मरीज के परिजनों को नहीं मिल रहा लाभ

मरीज कक्ष के बरामदे में रात काटने की मजबूरी

जांजगीर-चाम्पा। नईदुनिया प्रतिनिधि। तीन साल पहले 49 लाख रूपए की लागत से जिला अस्पताल परिसर में निर्मित अटल समरसता भवन का निर्माण हुआ है, मगर इसके बाद भी मरीजों के परिजनों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। विभागीय उदासनीता के चलते भवन के बाहर ताला लटक रहा है। इसे दूर दराज से आए मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए बनाया गया है पिᆬर भी इस सर्वसुविधायुक्त भवन में मरीजों के परिजनों को सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में उन्हें अस्पताल के बरामदे या वार्ड में ही समय काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।

राज्य शासन द्वारा जिलेवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रूपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन बनाया गया है, ताकि यहां पहुंचे मरीज व उनके परिजनों को सही उपचार मिल सके, मगर विभागीय उदासीनता के चलते यहां पहुंचे मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल परिसर में तीन साल पहले 49 लाख रूपए की लागत से अटल समरसता भवन बनवाया गया है। इसका निर्माण मरीजों के परिजनों की सुविधा को देखते हुए किया गया है। इस भवन में बिस्तर, गद्दा, तकिया, कूलर, पंखा के अलावा किचन, बाथरूम, टायलेट आदि की व्यवस्था है, मनोरंजन के लिए टीवी भी है और एक व्यक्ति का किराया एक दिन का मात्र 10 रूपए निर्धारित है। इसके कारण अटल समरसता भवन खाली पड़ा है। अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के चलते लाखों रूपये की लागत से निर्मित भवन बिना उपयोग के खण्डहर में तब्दील होने लगा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा यहां ताला जड़ दिया गया है। ऐसे में परिजन मरीजों के बेड के पास ही रहते हैं। कुछ परिजन तो मरीज के साथ ही सो जाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। ज्यादातर परिजन दिन में अस्पताल के बरामदों में टहलते और रात में सोए हुए मिलते हैं। इससे अस्पताल स्टापᆬ को भी अनावश्यक परेशानी होती है। समरसता भवन का लाभ नहीं मिलने से परिजन भी मरीजों के आसपास ही डटे रहते हैं।

विभिन्न कार्यक्रमों का हो रहा आयोजन

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल परिसर में मरीजों सहित परिजनों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए जाने के लिए लाखों रूपये की लागत से परिसर के अंदर भवन निर्माण कराया गया है, ताकि परिजनों को रात में रूकने की सुविधा मिल सके, मगर अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसका उपयोग परिजनों को सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है, ऐसे में परिजनों को अस्पताल परिसर के अंदर घूम-घूमकर मरीज की देखभाल करना पड़ रहा है।

गोदाम बनाए जाने को लेकर हुआ था विवाद

राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले के छूटे हुए लोगों का स्मार्ट कार्ड बनाया गया। विभाग द्वारा कुछ माह पूर्व स्मार्ट कार्ड बनाए जाने के लिए समरसता भवन चिन्हांकित कर कार्ड बनाया जा रहा था। इस दौरान भवन को लेकर ठेकेदार व अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद हुआ। जिसके चलते ठेकेदार द्वारा गोदाम से सामानों की चोरी व भवन में तोड़पᆬोड़ का हवाला देकर बीच में ही ताला लगा दिया गया था, हालांकि प्रबंधन की समझाइश के बाद गेट से ताला खोलकर पिᆬर से कार्ड बनाने का काम शुरू किया गया।

क्या कहते हैं परिजन

इस संबंध में पंतोरा निवासी पुष्पेन्द्र सिंह कंवर का कहना है कि उसके भाई सुपेन्द्र सिंह कंवर को पिछले माह घर जाते समय गड्ढे पर गिरने से चोटें आई थी, जिसके चलते उसका पैर पᆬैक्चर हो गया और उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिसर के अंदर समरसता भवन का निर्माण कराया गया है, मगर पिछले माह भर से यहां ताला लगा है। ऐसे में उन्हें व उनके परिजनों को बाहर व वार्ड के अंदर रात-दिन काटना पड़ रहा है। इसी तरह जांजगीर निवासी जयसिंह का कहना है उनके कमर में चोट लगने के चलते उन्हें पिछले पखवाड़े भर से भर्ती कराया गया था, मगर समरसता भवन में ताला लटकने के चलते उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हाथीटिकरा निवासी अरूण सूर्यवंशी का कहना है कि उनकी गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए 4 दिन पूर्व भर्ती कराया गया है, मगर पिछले चार दिनों से समरसता भवन में ताला लटका हुआ है, वहीं महिला वार्ड होने के चलते रात में यहां महिलाएं ही रूकती है। ऐसे में रात को उन्हें वार्ड के बाहर ही रात काटना पड़ रहा है।

''अस्पताल परिसर में मरीज के परिजनों के लिए निःशुल्क समरसता भवन संचालित किया जा रहा है, मगर परिजन मरीजों के पास ज्यादा समय रहना पसंद करते हेैं। इस संबंध में जानकारी ली जाएगी, यहां पहुंचे लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

डॉ. व्ही जयप्रकाश

सीएमएचओ एवं प्रभारी सिविल सर्जन

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