रायपुर। छत्तीगसढ़ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पांच उम्मीदवारों की घोषणा करके भाजपा से बढ़त बना ली है। लोकसभा उम्मीदवारों के चयन में कांग्रेस ने उन नेताओं के परिवारवालों से किनारा कर लिया है, जो पिछले तीन चुनाव पार्टी को जीत नहीं दिला पा रहे थे। इसके साथ ही जातिगत समीकरण का भी खासा ध्यान रखा गया है।

राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें कांग्रेस ने बस्तर में कर्मा और लखमा परिवार से अलग हटकर युवा नेता दीपक बैज पर दांव खेला है। वहीं, कांकेर में अरविंद नेताम और फूलोदेवी नेताम के परिवार की छाया से अलग बीरेश ठाकुर को मैदान में उतारा है।

वहीं, रायगढ़ में रामपुकार सिंह और सारंगढ़ पैलेस से दूरी बनाकर युवा आदिवासी चेहरा लालजीत राठिया को उम्मीदवार बनाया है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो दीपक बैज, लालजीत राठिया और बीरेश ठाकुर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पसंद हैं।

बस्तर लोकसभा में लंबे समय बाद दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा और मंत्री कवासी लखमा के परिवार से अलग हटकर टिकट दिया गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस बस्तर में एक युवा नेतृत्व खड़ा करना चाह रही है। इसके साथ ही लोहांडीगुड़ा में किसानों की जमीन वापसी के मुद्दे को भी भुनना चाहती है।

इस पैमाने पर दीपक खरे उतरे और टिकट की बाजी मार ले गए। दीपक दो बार के विधायक हैं और विधानसभा में बस्तर की आवाज को मुखर होकर उठाते रहे हैं। अब कांग्रेस के परिवावाद से किनारा करने के कारण भाजपा पर भी दबाव बना है।

भाजपा यहां से बलीराम कश्यप और उनके बेटे दिनेश कश्यप को पिछले छह चुनाव से उम्मीदवार बना रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा भी क्या परिवारवाद की छाया से अलग हटकर किसी नये उम्मीदवार को मैदान में उतारती है।

कांकेर लोकसभा में पूर्व मंत्री अरविंद नेताम और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम की दावेदारी को दरकिनार करके नये और युवा चेहरे बीरेश ठाकुर को मैदान में उतारा गया है। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो बीरेश की सक्रियता भानुप्रतापपुर जनपद अध्यक्ष के रूप में काफी रही। बीरेश विधानसभा में भी टिकट के दावेदारों में थे।

ऐसे में अब यह नजर आने लगा है कि कांग्रेस बस्तर और कांकेर में नये नेतृत्व को उभारने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। कांकेर लोकसभा से भाजपा से पहले सोहन पोटाई और अब प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने जीत दर्ज की है। भाजपा पिछले चुनाव में ही उसेंडी के रूप में नया नेतृत्व खोज चुकी है। चर्चा है कि अगर भाजपा उसेंडी को दोबारा उम्मीदवार बनाती है, तो बीरेश मजबूत चुनौती देंगे और परिणाम दिलचस्प आएंगे।


सरगुजा से गोंड समाज का सौम्य चेहरा

सरगुजा लोकसभा से उम्मीदवार बने खेलसाय सिंह की पहचान गोंड समाज के सौम्य चेहरे के रूप में की जाती है। मंत्री टीएस सिंहदेव के करीबी खेलसाय तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रहे हैं। सरगुजा लोकसभा की छह विधानसभा में गोंड वोटर प्रभावी हैं। भाजपा सांसद कमलभान सिंह भी गोंड समाज से आते हैं।

ऐसे में सामाजिक समीकरण को देखते हुए खेलसाय की उम्मीदवारी को काफी मजबूत माना जा रहा है। सरगुजा की सभी सीट पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या भाजपा कमलभान पर दांव लगाती है, या फिर किसी नये चेहरे को मैदान में उतारकर बाजी मरने की कोशिश करती है।

पिता की इंदिरा-राजीव से करीबी का इनाम

जांजगीर-चांपा लोकसभा में अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रहे पारसराम भारद्वाज के बेटे रवि भारद्वाज को उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी रहे पारसराम सारंगढ़ लोकसभा से छह बार सांसद चुने गये। सौम्य और जनसंपर्क के दम पर जीत दर्ज करने वाले पारसराम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से नजदीकी थी।

प्रेक्षकों की मानें तो इंदिरा-राजीव से नजदीकी और कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पहचार रखने के कारण विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी रवि को लोसकभा में उम्मीदवार बनाया गया है। भारद्वाज का चंद्रपुर, पामगढ़, बिलाईगढ़ और कसडोल विधानसभा में खासा जनाधार माना जाता है। जांजगीर से भाजपा लगातार कमला पाटले को उम्मीदवार बना रही है और जीत भी दर्ज कर रही है। इस चुनाव में संगठन की नाराजगी और सभी सीटों पर मिली हार के बाद भाजपा नये सिरे से उम्मीदवार के नाम पर विचार कर रही है।

राजपरिवार की हार के बाद अब नई उम्मीद

रायगढ़ लोकसभा में राजपरिवार के उम्मीदवारों को उतार-उतार कर हार का सामना करने वाली कांग्रेस ने अब लालजीत सिंह राठिया के रूप में नई उम्मीद तलाशी है। पूर्व मंत्री चनेशराम राठिया के बेटे और दो बार के विधायक लालजीत राठिया के सामने भाजपा से चार बार के सांसद और मोदी सरकार में मंत्री विष्णुदेव साय आ सकते हैं।

कांग्रेस ने लोकसभा में राजपरिवार के मेनका सिंह, पुष्पादेवी सिंह और वरिष्ठ आदिवासी नेता रामपुकार सिंह, उनकी बेटी आरती सिंह को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन विष्णुदेव के मुकाबले सब फेल हो गये। अब कंवर आदिवासी लालजीत पर बड़ा दांव खेला है।

भूपेश सरकार में उनको केंद्रीय मंत्री का दर्जा देकर विष्णुदेव के सामने खड़ा करने की पहले ही रणनीति बना ली गई थी। विधानसभा चुनाव में रायगढ़ लोकसभा की सभी सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है। खास बात यह है कि धरमजयगढ़ रायगढ़ लोकसभा के मध्य में आता है और यहां से सभी आठ सीट को कवर किया जा सकता है। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला रोचक होने की संभावना है।