बिलासपुर। 17 लाख 89 हजार 698 मतदाताओं वाले बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के मतदाताओं की बहुलता के साथ ही ये प्रभावी भूमिका में भी हैं। इस वर्ग के मतदाताओं का झुकाव कभी कांग्रेस तो कभी बहुजन समाज पार्टी की ओर रहा है।

हालांकि यह वर्ग कांग्रेस का परंपरागत मतदाता है। खास बात यह है कि यह वर्ग घूमने-फिरने का शौकीन है। इस वर्ग के अधिकांश लोग अक्सर छह माह या साल भर के लिए घर-बार छोड़कर देशाटन या कामकाज के लिए चले जाते हैं। अब चुनाव का समय है और इस वर्ग के बड़ी संख्या में मतदाता यहां नहीं हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों के लिए यही चिंता का विषय है कि उसके परंपरागत मतदाता पलायन कर रहे हैं।

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के मतदाता परंपरागत रूप से कांग्रेस का होने के बावजूद बसपा ने भी सेंध लगाई थी । बसपा के कमजोर होने और जकांछ के अस्तित्व में आने के बाद इस वर्ग का ध्रुवीकरण जकांछ की ओर भी हुआ। अब जकांछ लोकसभा चुनाव के मैदान से बाहर है और बसपा के साथ समझौता होने के कारण साझा कैंपेनिंग चल रहा है।

विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में कांग्रेस की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है। जब प्रदेश में बदलाव का माहौल चला उस वक्त भी जिले में इसका असर दिखाई नहीं दिया। जिले की सात में से मात्र दो सीटों पर कांग्रेस काबिज हो पाई। दो पर जकांछ और तीन सीटों पर भाजपा जीतने में सफल रहे । अजा वर्ग के मतदाताओं का ध्रुवीकरण भी काफी तेजी के साथ हुआ ।

बीते लोकसभा चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो कांग्रेस प्रत्याशी कस्र्णा शुक्ला मोदी लहर में एक लाख 76 हजार वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हार गई थीं। देशभर में मोदी लहर के बाद भी अजा वर्ग के मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा था। अब किसी एक दल या फिर किसी एक नेता के पक्ष में लहर भी नहीं चल रही है। हालांकि बसपाई रणनीतिकार भी परंपरागत वोटरों को अपनी पक्ष में करने जोर आजमाइश कर रहे हैं।

कांग्रेस के लिए परेशानी यह है कि बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलासपुर विधानसभा को छोड़ दें तो हर विधानसभा क्षेत्र से 15 से 20 हजार मतदाता बाहर चले गए हैं और अभी तक लौटे नहीं हैं। ऐन चुनाव के समय क्षेत्र में न होने का असर न केवल मतदान के प्रतिशत पर पड़ेगा, बल्कि राजनीतिक दलों के जीत-हार पर भी असर डालेगा। परंपरागत वोट बैंक के पलायन करने से रणनीतिकारों का चिंतित होना भी स्वाभाविक है।


यहां दिखाई दे रहा पलायन का असर

मस्तूरी, बिल्हा, मुंगेली, लोरमी, तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पलायन का असर कुछ ज्यादा ही दिखाई दे रहा है। मस्तूरी, बिल्हा व मुंगेली में भाजपा और लोरमी में जकांछ व तखतपुर में कांग्रेस के विधायक काबिज हैं। जाहिर है इनके सामने भी विधानसभा की लीड को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती है।