जशपुरनगर/बागबहार। पत्थलगांव विकासखंड के बागबहार पंचायत में स्थित रियासतकालीन जमींदार की समाधि हर चुनाव के लिए खास होती है। जमींदार के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि उक्त स्थल को देवस्थल के रूप में माना जाता है। हर चुनाव में क्षेत्र के प्रत्याशी इस स्थान पर शराब चढ़ाकर जीतने पर फिर शराब चढ़ाने की मन्नत मांगते हैं। चुनाव से पहले और जीतने पर हर राजनीतिक दल के प्रत्याशी यहां शराब चढ़ाने आते हैं।

उदयपुर रियासत के जमींदार स्व ठाकुर बोध सिंह सरदार की समाधि बागबहार पंचायत में आस्था का केंद्र है। यहां खास अवसरों पर मन्न्त मांगने का तरीका ही कुछ अलग है। सबसे अधिक चर्चा किसी भी चुनाव के समय होती है। पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा और लोकसभा में भी प्रत्याशियों सहित उनके समर्थक यहां शराब चढ़ाते हैं।

पूर्व जमींदार स्व बोध सिंह ठाकुर को बूढ़ा सरदार के नाम से जाना जाता है। क्षेत्र के लोगों की मान्यता है कि बूढ़ा सरदार दैविक शक्तियों से परिपूर्ण थे और उनकी समाधि स्थल को ग्राम देवता के रूप में सम्मान प्राप्त है। मान्यता यह भी है कि यह ग्राम देवता ग्राम की रक्षा करते हैं और सफेद घोड़े पर सवार होकर रियासतकालीन जमींदारी क्षेत्र में वे आज भी विचरण करते हुए रक्षा करते हैं।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले बूढ़ा सरदार की समाधि पर शराब और नारियल लेकर चढ़ाने से मन्न्तें पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद भी लोग यहां शराब चढ़ाते हैं। राजनीतिक हो या खेल का क्षेत्र या फि‍र सांस्कृतिक आयोजन। हर क्षेत्र में यहां के प्रति आस्था रखने वाले शराब जरूर चढ़ाते हैं। कुछ लोग बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं।

कुछ वर्ष पहले यहां थानेदार रहे स्व मानिकपुरी ने संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी। बताया जाता है कि सरदार बोध सिंह ने उनसे कहा कि यदि वे शराब और नारियल भेंट करते हैं तो उनकी मन्न्त जरूरी पूरी होगी। जब स्व मानिकपुरी को संतान प्राप्ति हुई तो उनके द्वारा यहां नियमित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। तब से इस स्थान की ख्याति दूर-दूर तक होने लगी। कृष्ण कुमार गुप्ता बताते हैं कि सिर्फ बागबहार ही नहीं बल्कि दूर-दराज के लोग मन्नत लेकर आते हैं और शराब का चढ़ावा चढ़ाते हैं।

गत विधान सभा चुनाव में विधायक शिवशंकर साय ने यहां शराब चढ़ाया था और चुनाव के बाद भी वे यहां दल-बल के साथ शराब चढ़ाने पहुंचे थे। इसके बाद इस स्थान की चर्चा खूब हुई। बूढ़ा सरदार के इस समाधि स्थल का स्वरूप पूर्व में सामान्य था। जिसे गुप्ता परिवार के द्वारा एक मंदिर का स्वरूप दे दिया गया।