महासमुंद। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर में 20 से अधिक बैंक संचालित हैं। सभी बैंक के पास शासकीय विभागों का खाता है, जिसमें विभिन्न शासकीय योजनाओं का फंड डाला जाता है। बावजूद कुछ बैंक शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में उदासीनता बरत रहे हैं। स्वरोजगार के लिए महिला समूहों एवं व्यक्तिगत स्वरोजगार योजना के तहत ऋण देने में ज्यादातर बैंक सामने आए, वहीं कुछ बैंक पीछे रहे। साल भर में ऐसे आधा दर्जन बैंक ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को एक भी ऋ ण स्वीकृत नहीं किया। इधर बैंक में हितग्राही जब प्रस्ताव भेजने पूर्व ऋ ण की जानकारी लेते हैं तो उन्हें पहले ही इंकार कर दिया जाता है, जिससे हितग्राही ऐसे बैंक का उल्लेख ही नहीं करते। इससे होता यह है कि ऋ ण देने वालों बैंक के पास कतार लग जाती है और इनका लक्ष्य पूरा होते ही हितग्राहियों को निराश होना पड़ता है। बाद उन्हें अन्य बैंक में आवेदन देने के लिए फिर से वही प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के नगर कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार बहुत से बैंक ने साल भर ऋ ण वितरण के लिए भौतिक लक्ष्य निर्धारित कि या है, जिसके मुताबिक ऐसे बैंक को प्रकरण भेजा गया है, बावजूद भौतिक लक्ष्य के अनुरूप बैंक प्रबंधनों ने ऋ ण वितरण में सक्रियता नहीं दिखाई।

व्यक्तिगत प्रकरण में 155 का लक्ष्य महज 30 को मिला ऋ ण

एनयूएलएम के नगर कार्यालय को मिले नवंबर महीने की मासिक जानकारी अनुसार नगर में संचालित बैंक से वर्ष 2018-19 के लिए स्वरोजगार कार्यक्रम के तहत व्यक्तिगतण ऋ ण देने 155 हितग्राहियों का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष की दो तिमाही बीत गई है और अब तक सिर्फ 30 प्रकरण पर 32 लाख रुपये का ऋ ण स्वीकृत किया गया है। जबकि एनयूएलएम कार्यालय से अब तक 154 प्रकरण भेजे जा चुके हैं। वहीं 26 लाख ऋ ण राशि का 34 प्रकरण अस्वीकृत कर दिया गया है। साथ ही एक करोड़ 10 लाख रुपये का 98 प्रकरण लंबित रखा गया है।

समूह ऋ ण के भेजे गए 53 प्रकरण पर 41 स्वीकृत

एनयूएलएम की बैंक लिंकेज ऋ ण प्रकरण के लिए नगर में संचालित विभिन्न बैंक से सालभर में 100 प्रकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिसके आधार पर एनयूएलएम कार्यालय ने 73.50 लाख रुपये का 53 प्रकरण ही अब तक भेजा है। इनमें 63.40 लाख रुपये के 41 प्रकरण को बैंक ने स्वीकृत किया और ऋ ण जारी किया है। जबकि 10 लाख रुपये के 12 ऋ ण प्रकरण लंबित हैं।

प्रकरण जाने के बाद भी व्यक्तिगत ऋ ण की स्वीकृति लंबित

एनयूएलएम नगर कार्यालय के अनुसार इलाहाबाद बैंक को आठ प्रकरण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें छह प्रकरण गया है और इनमें से एक भी प्रकरण पर अब तक ऋ ण स्वीकृत नहीं किया गया है। इसी तरह एसबीआइ के 33 प्रकरण के लक्ष्य में 11 प्रकरण भेजा गया है,

सिंडीकेट बैंक के छह प्रकरण के लक्ष्य में चार प्रकरण गया है, एक्सिस बैंक में पांच प्रकरण के भौतिक लक्ष्य पर पांच प्रकरण भेजा गया है, आइडीबीआइ के 10 प्रकरण के लक्ष्य पर तीन प्रकरण भेजा गया है, देना बैंक को चार प्रकरण भेजा गया है, लक्ष्मी विलास बैंक के चार प्रकरण के लक्ष्य पर छह लाख रुपये ऋ ण राशि का पांच प्रकरण भेजा गया है। लेकिन किसी भी बैंक ने नवंबर महीने तक ऋ ण स्वीकृत नहीं किया है।

इन बैंकांें का लक्ष्य निर्धारित नहीं

स्वरोजगार योजनाओं के तहत व्यक्तिगत व समूह लोन देने के लिए एचडीएफसी बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, डीसीबी बैंक, कोटक महेंद्रा बैंक, बंधन बैंक ने लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। इन बैंक को एनयूएलएम से प्रकरण नहीं भेजा गया है। साथ ही योजना के तहत व्यक्तिगतण ऋ ण के लिए लोग आवेदकों ने इन बैंक का उल्लेख नहीं किया।

वर्जन

'बैंक से संबंधित सरकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए प्रत्येक तिमाही बैठक होती है। बैठक में प्रत्येक बैंक से जानकारी ली जाती है। जिन बैंकों ने महिला समूहों व युवाओं को स्वरोजगार ऋ ण देने में उदासीनता दिखाई है, उनसे जानकारी लेंगे, साथ ही ऐसे बैंक का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।'

-अरुण मिश्रा, लीड बैंक प्रबंधक महासमुंद

वर्जन

'ऋ ण देने में उदासीनता जैसी कोई बात नहीं है। बैंक में प्रकरण आएगा और प्रकरण पात्र होगा तो जरूर ऋ ण दिया जाएगा। लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रकरण हम तक आया नहीं।'

-नीरज श्रीवास्तव, शाखा प्रबंधक कोटक महेंद्रा बैंक महासमुंद,

वर्जन

'योजनाओं के तहत कौन सा बैंक कितना सहयोग करेगा यह लीड बैंक से तय होता है और वे हमें लक्ष्य से अवगत कराते हैं। शहर में संचालित पांच-छह बैंक से हमें टारगेट नहीं मिला, साथ ही किसी हितग्राही ने भी इन बैंक से ऋ ण लेने के लिए आवेदन नहीं किया। हितग्राही से आवेदन मिलता है, लीड बैंक से लक्ष्य मिलता है तो इन बैंक प्रबंधकों को भी प्रकरण भेजा जाएगा।ं

-विकास राय, मिशन प्रबंधक राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन महासमुंद

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