आशुतोष शर्मा

महासमुंद। नईदुनिया प्रतिनिधि

मुंबई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर आरंग से ओडिशा सीमा स्थित रेहटीखोल तक फोरलेन में किसी भी आपात स्थिति की जानकारी देने और मदद मांगने के लिए प्रत्येक एक किलोमीटर में इमरजेंसी कॉल बाक्स की सुविधा है। इस सुविधा से राहगीरों को बड़ी मदद मिल रही है। फोरलेन पर दिन हो या रात का सफर राहगीर इस सुविधा के चलते हर जगह महफुज है। बस एक मुफ्त कॉल से मिनटों में एंबुलेंस और पुलिस की मदद मिलती है।

प्रत्येक किलोमीटर में एक ईसीबी

बताया गया है कि डेढ़ सौ किमी की सड़क पर प्रत्येक एक किलोमीटर में एक इमरजेंसी कॉल बाक्स लगाया गया है। राहगीरों की सुविधा के लिए इसे सड़क के दोनों तरफ वक्रीय क्रम में लगाया गया है। इसका अर्थ यह है कि वन वे में प्रत्येक ईसीबी दो किमी की दूर पर है, लेकिन सड़क के दूसरे ओर नजर डालें तो प्रत्येक किलो मीटर में एक ईसीबी है। इस प्रकार आंरग से रेहटीखोल तक बाएं तरफ 75 और रेहटीखोल से आरंग तक बाएं तरफ 75 कॉल बाक्स लगाए गए हैं।

बटन दबाते ही मिलता है रिस्पांस

कॉल बाक्स पर बटन दबाते ही ढांक टोल प्लाजा में बनाए गए कॉल सेंटर से रिस्पांस मिलता है। इधर व्यक्ति सूचना दे सकता है, हेल्प मांगता है। जिस पर कॉल सेंटर से उन्हें यथासंभव मदद मिलती है। यहां कालर की आवाज, सूचना रिकार्ड होती है।

छह माह में मिले 262 कॉल, 130 फर्जी

नवंबर 2018 से लेकर अप्रैल 2019 तक छह महीने में 262 लोगों ने इमरजेंसी कॉल बाक्स का उपयोग किया। इनमें से 130 लोगों ने फर्जी कॉल कर अमले को परेशान भी किया। ऐसे लोगों की पहचान भी की गई, कुछ ग्रामीण बच्चे निकले और कुछ मनोरोगी निकले। हालांकि 132 कॉल जरूरतमंदों के रहे। जिन्होंने सड़क दुर्घटना, सड़क व्यवस्था की जानकारी दी। बताया गया है कि आरंग में बस दुर्घटना की खबर किसी राहगीर ने ईसीबी से दी, जिस पर ही समीपस्थ पुलिस को खबर पर त्वरित सहायता दी गई। कंपनी का एंबुलेंस भी पहुंचा। यहीं नहीं कोडार के पास ट्रक में आगजनी जैसी कई घटनाएं ईसीबी के जरिए राहगीरों ने दी।

जानकारी भी लेते हैं राहगीर

बताया गया है कि रात में सफर के दौरान जब किसी राहगीर को सड़क किनारे किसी गांव का पता पूछने के लिए कोई व्यक्ति नहीं मिलता तो ईसीबी पर कॉल लगाकर लोग मदद मांगते हैं। फोरलेन पर लगे प्रत्येक ईसीबी का लोकेशन कॉल सेंटर से त्वरित ट्रेस होता है, जिससे कॉल सेंटर में मौजूद स्टाफ मदद मांगने वाले राहगीर को उसका लोकेशन बताता है, राहगीर गंतव्य से आगे निकल गया है या पीछे है, यह जानकारी यथासंभव कॉल सेंटर से राहगीर को मिल जाती है, जिससे रात के सफर में राहगीरों को बड़ी मदद मिलती है।

मददगार है ईसीबी

फोटो- खोमन साहू

ग्रामीण खोमन साहू ने बताया गया कि फोरलेन बनने से गांव व सड़क की पुरानी पहचान खो गई है। ऐसे में बहुत से लोगों को फोरलेन में सफर के दौरान गांव पहचान पाना कठिन होता है। दिन में लोग आसानी से नजर आते हैं, जिनसे पूछकर राहगीर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, लेकिन रात में पता बताने वाला कोई नहीं होता, ऐसे में इमरजेंसी कॉल बाक्स से राहगीरों को बड़ी मदद मिलती है।

बटन दबाने पर मिलता है रिस्पांस

फोटो- जगतराम कुर्रे

ग्रामीण जगतराम कुर्रे ने बताया कि एक ही सड़क पर प्रत्येक दो किमी पर ईसीबी है। इससे दूरी का भी पता लगता है। रास्ते में कभी कोई दुर्घटना हो जाए और पास में मोबाइल न हो, या मोबाइल में बेलेंस न हो तो ईसीबी का बटन दबाते ही तुरंत रिस्पांस मिलता है।

वर्जन

-'आरंग से रेहटीखोल तक डेढ़ सौ किमी में डेढ़ सौ ईसीबी लगे हैं। 24 घंटे मॉनिटरिंग होती है। कॉल मिलने पर राहगीरों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। आरंग बस दुर्घटना सहित कुछ बड़े हादसों की सूचना सबसे पहले ईसीबी से मिली, जिस पर मदद दी गई।'

-प्रवीण शर्मा, प्रबंधक बीएसपीसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ढांक टोल प्लाजा

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