महासमुंद। नईदुनिया न्यूज

सिरपुर क्षेत्र के हाथी प्रभावित ग्राम लहंगर, गुड़रुडीह, परसाडीह सहित आसपास गांव के ग्रामीण एक बार फिर से दहशत में आ गए हैं। वहीं ग्राम खिरसाली-बंदोरा के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हाथियों ने पिछले सप्ताह भर से खिरसाली-बंदोरा के जंगल में डेरा जमाया हुआ था, जो 16-17 मई की दरम्यानी रात अचानकपुर, फुसेराडीह, पीढ़ी बांध होते हुए करीब 10 से 15 किलोमीटर दूरी तय करते हुए पुनः लहंगर-परसाडीह क्षेत्र के जंगल में धमक गए हैं। शुक्रवार 17 मई की शाम सात बजे खबर लिखे जाने तक तीन हाथियों के लहंगर-गुड़रुडीह के मध्य कोसमनाला में ठहरने की जानकारी मिली है। वहीं 16 हाथियों का लोकेशन लहंगर-परसाडीह के मध्य अमली घाट में मिला है। इन हाथियों ने 16-17 मई की दरम्यानी रात परसाडीह में किसान हृदय ध्रुव के खेत में पहुंचकर जमकर उत्पात मचाया, जिससे किसान को काफी नुकसान पहुंचा है।

ग्राम खिरसाली के ग्रामीण डिलेश पटेल ने बताया कि क्षेत्र से हाथियों के जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हाथियों के भय से रात की नींद उड़ गई थी। काम-धंधा चौपट हो रहा था। लोग घरों से निकल नहीं पा रहे थे। हमेशा हाथियों को लेकर लोगों में दहशत रहता था। हालांकि अभी भी संकट ज्यादा टला नहीं है। पुनः आ धमकें यह भय भी लोगों के मन में समाया हुआ है। हाथियों के भय से ग्रामीण तेंदूपत्ता संग्रहण करने भी नहीं जा पा रहे थे, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान हो रहा था। डिलेश ने बताया कि संभवतः 18 मई को तेंदूपत्ता तोड़ाई कराया जाएगा। ग्रामीण हाथियों के लोकेशन पता कर घर से निकलते हैं. संभवतः 18 मई को ग्रामीण बेखौफ होकर पत्ता तोड़ सकेंगे।

हाथियों के आतंक से दहशत में ग्रामीण

पिछले तीन-चार वर्षों से सिरपुर क्षेत्र के जंगल को गढ़ मान चुके हाथियों के उत्पात से ग्रामीण दहशत के साये में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ग्राम लहंगर, पीढ़ी, परसाडीह, गुड़रुडीह, खड़सा, सेनकपाट, फुसेराडीह, जोबा, अछोला आदि गांव के जंगल में हाथियों का दल स्वच्छंद विचरण कर बाड़ी और खेतों में लगी सब्जीभाजी और धान की फसल को लगातार नुकसान पहुंचाते आ रहे हैं। हाथियों के आतंक से बचने का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है, जिससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष व्याप्त है। सिरपुर क्षेत्र के हाथी प्रभावित विभिन्न गांव के लोग मुश्किल से एक सप्ताह हाथियों के आतंक से मुक्त रहते हैं। उसके बाद फिर हाथियों का दल घुम-फिरकर उसी जंगल में पहुंच जाते हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत है।