आनंदराम साहू, महासमुंद। आज जब भीषण गर्मी में प्रदेश के ज्यादातर इलाके के लोग पेयजल व निस्तारी के संकट से जूझ रहे हैं, जिले की पथरीली जमीन पर बसे अंदरूनी गांव बांसकुढ़ा में लोगों को भरपूर पानी मिल रहा है। तालाब में करीब पांच फीट पानी है। यह सबकुछ हो रहा है ग्राम जल सुरक्षा समिति की बदौलत।

गांव का बच्चा-बच्चा पानी का मोल समझता है। खास बात यह कि गांव के किसी भी व्यक्ति को नल का निजी कनेक्शन नहीं दिया गया है। अमीर हो या गरीब, सभी सार्वजनिक नल से पानी भरते हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण खुद तय समय में पानी का टैक्स समिति में जमा कर देते हैं। आज यह गांव जलापूर्ति व्यवस्था का मॉडल बन गया है।

बांसकुढ़ा के लोगों ने वर्षों तक भीषण जलसंकट झेला है। करीब छह सौ की आबादी वाले इस गांव के लोगों को पानी के लिए ढाई-तीन किलोमीटर दूर स्थित गांवों पर आश्रित रहना पड़ता था। यह जिले का सबसे ज्यादा जलसंकट वाला गांव था। वर्ष 2007-08 में दिल्ली की टीम यहां पहुंची। पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि बीआरजीएफ से बांसकुढ़ा के आश्रित गांव कुहरी में नल-जल की स्वीकृति दिलाई। दोनों गांवों के बीच लंबी तीन किमी पाइप लाइन बिछाई गई। फिर भी समस्या खत्म नहीं हुई।

जल क्रांति अभियान ने दी दिशा

पांच जून 2015 को केंद्र सरकार ने देश भर में जल क्रांति अभियान की शुरुआत की। इसमें सभी जिलों के सबसे ज्यादा जलसंकट ग्रस्त दो गांवों का चयन किया गया। महासमुंद जिले से बांसकुढ़ा बनसुंडा का चयन हुआ। बनसुंडा में तो इस योजना पर कोई काम नहीं हुआ, लेकिन बांसकुढ़ा में वर्ष 2016 में ग्राम जल सुरक्षा समिति गठित हुई। यहां से शुरू हुई सफलता की कहानी।

इस तरह की व्यवस्था

सचिव शिवकुमार पटेल ने बताया कि गांव में दो बोर कराए गए। कुहरी गांव में पहले से बोर हुआ था। तीनों बोर की पाइप लाइन को जोड़ दिया गया। गांव में 14 स्थानों पर सार्वजनिक नल लगाए गए हैं। सभी टोटियां लगी हैं। मोटर पंप से पानी न खींच सकें, इसके लिए किसी को भी नल कनेक्शन नहीं दिया गया है। पानी की टंकियां भी बना बनाई गई हैं, जिनमें सोलर सिस्टम लगा है। बिजली न भी रहे तो भी पानी मिलेगा। पाइप लाइन के जरिए गांव के तालाब तक पानी पहुंचाया जाता है।

दिन नहीं, एक समय भी जलापूर्ति बाधित नहीं

पानी के लिए हम किसी निकाय पर निर्भर नहीं हैं। ग्राम जल सुरक्षा समिति जलापूर्ति व्यवस्था का संचालन व संधारण करती है। लोग खुद जल कर वसूलते हैं और जमा करते हैं। एक समय भी जलापूर्ति बाधित नहीं होती। पाइप बदलने, नल, टोटियां, बिजली बिल, मोटर पंप आदि सब का संधारण समिति करती है। तीनों बोर की पाइप जोड़ देने से कोई पंप बिगड़ता है, तो भी पानी मिलता है। - नंदनी यादव, सरपंच बांसकुढ़ा