महासमुंद। महासमुंद में भाजपा प्रत्याशी चुन्नीलाल साहू ने जीत दर्ज कर ली है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी धनेंद्र साहू से उन्हें कड़ी टक्कर मिली। हालांकि अंतिम चरणों की मतगणना में चुन्नीलाल साहू आगे निकल गए और जीत दर्ज कर ली।

गौरतलब है कि एक वक्त में यह कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था। यही वजह है कि लगातार दो चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस यहां हर चुनाव में कड़ी टक्कर देती है। विद्याचरण शुक्ल यहां से छह बार सांसद चुने गए। राज्य निर्माण के बाद 2004 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट से अजीत जोगी ने चुनाव जीता।

गौरतलब है कि पूर्व विदेश मंत्री विद्याचरण शुक्ल, अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम श्यामाचरण शुक्ल और पूर्व सीएम अजीत जोगी की उम्मीदवारी से प्रतिष्ठित व चर्चित रही छत्तीसगढ़ की महासमुंद सीट पर इस बार चुनावी हलचल मिली- जुली कहानी की तरह लग रही थी।

महासमुंद लोकसभा क्षेत्र छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले से धमतरी जिले तक फैला हुआ है। भौगोलिक के साथ राजनीतिक भिन्नता भी सीट की विशेषता है। मुद्दों की बात करें तो भाजपा ने महासमुंद के स्थानीय व्यक्तित्व चुन्नीलाल साहू पर भरोसा जताया था तो कांग्रेस के प्रत्याशी धनेंद्र साहू की स्थानीयता धमतरी-कुरुद इलाके को ज्यादा प्रभावित करती थी।

बीते लोकसभा चुनाव में महज 1217 वोटों से जीतने वाले भाजपा सांसद चंदूलाल साहू इस बार मैदान में नहीं थे। उनकी जगह आए खल्लारी के चुन्नीलाल साहू विकास के मुद्दों को साथ लेकर चल रहे थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी व अभनपुर के विधायक धनेंद्र साहू मैदान में थे।

ये थे महासमुंद सीट के मुद्दे

बाहरी और स्थानीय मुद्दा इलाके के हिसाब से बंट गया

कर्जमाफी पर कांग्रेस का फोकस, तो भाजपा दिखा रही थी विकास

बिजली बिल हाफ किया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली गुल

भाजपा शहर में मोदी, तो कांग्रेस ग्रामीण इलाकों में किसान को बना रही मुद्दा