महासमुंद। देश के रक्षा सौदे में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ जब विपक्ष ने आरोप लगाया और राफेल का नाम लिया गया तो छतीसगढ़ के महासमुंद जिले के इस छोटे से गांव के लोग सहम गए। शिक्षित और अशिक्षित सभी एकदूजे से पूछने लगे कि राफेल ने ऐसा क्या किया कि देश में जिक्र होने लगी। दरअसल महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक का छोटा सा गांव है राफेल।

राफेल ग्राम पंचायत मुख्यालय है। राफेल, परेवापाली, बागद्वारी, देवरीगढ़ ग्रामों से मिलकर ग्राम पंचायत बना है। इन चार गांव की कुल आबादी लगभग 1700 है। और लगभग एक हजार मतदाता इस पंचायत में है। सरायपाली से संबलपुर ओडिशा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 53 पर सरायपाली से 14 किमी की दूरी पर छुईपाली गांव है, यहां से तीन किमी भीतर राफेल गांव है। एनएच पर बकायदा राफेल गांव के लिए सूचना बोर्ड लगा हुआ है।

13 पंच और एक सरपंच के साथ ग्राम पंचायत बॉडी है। मूलतः यहां कुम्हारों की संख्या अधिक है बाद आदिवासी हैं। इनके अलावा अन्य समाज के भी रहवासी हैं। यूं तो गांव में 75 फीसद आबादी शिक्षित है, बावजूद शुरुआती दौर में राष्ट्रीय मसला और चर्चा का केंद्र बिंदु बना राफेल को समझ पाना ग्रामीणों के लिए कठिन रहा। बाद जब बार बार गांव का नाम सुर्खियों में आया तो शिक्षित युवाओं ने मसले को जानने अध्ययन किया। सोशल मीडिया, यू ट्यूब, विपक्ष के भाषणों को सुना, तब उन्हें यह ज्ञात हुआ की राफेल या राफेल के लोगों ने कुछ नहीं किया।

राफेल की जो चर्चा हो रही है वह उनके गांव की नही बल्कि रक्षा सौदे और लड़ाकू विमान की चर्चा है। सरपंच धनीराम पटेल का कहना है कि गांव के अशिक्षित लोग जब भी राफेल का जिक्र होता है तो गांव का ही जिक्र होना समझते हैं। विपक्ष जब कहता है कि सरकार आएगी तो राफेल की जांच कराएंगे तो लोग पूछते हैं गांव में किस बात की जांच होगी। बहरहाल शिक्षित लोगों को अब राफेल के जिक्र से असुविधा नहीं होती। वे जानते हैं कि यह चर्चा उनके गांव की नहीं है।

पटेल ने बताया कि उड़िया भाषा में राफेल का अर्थ पलायन से है। गांव के लोग रोजीरोटी के लिए पलायन करते थे तभी अरसे पहले गांव का नाम राफेल हो गया। मूलतः उड़िया शब्दावली से राफेल नाम लिया गया है।