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    मलेरिया के प्रकोप के बाद काम चलाऊ इलाज

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    अंबिकापुर/सूरजपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड का बिहारपुर क्षेत्र पहले से ही मलेरिया के लिए अतिसंवेदनशील रहा है। पूर्व के वर्षों में भी इस इलाके में मलेरिया और दूसरी मौसमी बीमारियों से लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। इसके बावजूद मलेरिया से बचाव के लिए क्षेत्र में बारिश से पहले कोई प्रबंध नहीं किए गए। अब जब मलेरिया भयावह रुप ले चुका है तो जांच और उपचार सुविधा के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं और काम चलाऊ इलाज की व्यवस्था से असमय ही लोगों की जान जा रही है। मलेरिया से 18 मौतों के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और बेहतर तरीके से जांच व उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं कराने का आरोप कांग्रेस की जांच टीम ने लगाया है। इस मामले को लेकर सोमवार को कांग्रेस जिला प्रशासन के समक्ष मांग रखेगी। यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो स्वास्थ्य सुविधा की बेहतरी के लिए सत्याग्रह करने का निर्णय लिया गया है।

    बिहारपुर क्षेत्र में मलेरिया से सिलसिलेवार हो रही मौतों के मद्देनजर इलाके में उपलब्ध कराई गई जांच और उपचार सुविधा का जायजा लेने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की टीम रविवार को प्रभावित इलाके में पहुंची। विधायक खेलसाय सिंह, पारसनाथ राजवाड़े, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, प्रदेश सचिव शफी अहमद, पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस की टीम ने जिला व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को साथ लेकर मलेरिया प्रभावित कोल्हुआ, महुली, बिहारपुर, मोहरसोप गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों और मलेरिया पीड़ितों से मुलाकात कर मलेरिया से बचाव और वर्तमान स्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर जानकारी जुटाई। कोल्हुआ के बेस कैंप व बिहारपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का अवलोकन करने के साथ ही टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों व चिकित्सकों से भी चर्चा की। समूचे इलाके का दौरा करने के बाद कांग्रेस की जांच टीम ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव शफी अहमद का आरोप है कि पिछड़े क्षेत्र में मलेरिया भयावह रुप ले चुकी है इसके बावजूद सरकार की लापरवाही व असंवेदनशीलता बरकरार है। इलाका मलेरिया के लिए अतिसंवेदनशील है इसके बावजूद बरसात से पहले मलेरिया से बचाव हेतु दवाईयों का छिड़काव नहीं कराया गया। स्थिति यह है कि लगभग डेढ़ हजार लोग मलेरिया से पीड़ित हैं। मलेरिया पीड़ितों की संख्या और प्रभावित ग्रामों की आबादी को लेकर अधिकारियों से जानकारी मांगने पर मौके पर उपलब्ध न करा पाने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि आबादी के हिसाब से यदि 10 प्रतिशत से अधिक लोग मलेरिया से पीड़ित हैं तो सरकारी तौर पर क्षेत्र को संक्रमण महामारी का इलाका घोषित किया जाना चाहिए लेकिन इससे बचने के लिए ही शायद जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि मलेरिया पीड़ितों को टायफाइड भी हो रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक टायफाइड जांच की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। मलेरिया पीड़ित यदि दवाई से ठीक हो गए तो अच्छा अन्यथा उनकी असमय मौतें हो रही हैं। बच्चों में कुपोषण है। इसके बावजूद रेडी टू ईट को गुणवत्तापूर्ण बनाने अभी तक पहल नहीं हुई। 100 मलेरिया पीड़ितों में 80 मरीज ऐसे हैं जिनमें खून की कमी पाई जा रही है लेकिन रक्त चढ़ाने की व्यवस्था भी आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे गंभीर मरीजों को सूरजपुर जिला अस्पताल भेजा रहा है। वहां आने-जाने में भी मरीजों को परेशानी हो रही है। कोल्हुआ कैंप व बिहारपुर अस्पताल में 16 से 20 लोगों को भर्ती कर इलाज करने की सुविधा है शेष मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। यह व्यवस्था बीमारी के प्रकोप के हिसाब से असंवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि एक घर में अधिकतम दो मच्छरदानी दी जा रही है और उस घर में परिवार के सदस्यों की संख्या पांच से सात तक है। ऐसे में शेष सदस्यों को मलेरिया से बचाव के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। डीडीटी के छिड़काव में भी मनमानी की जा रही है। आंशिक तौर पर प्रभावित क्षेत्र में दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है। पूरी व्यवस्था काम चलाऊ है जो बीमारी के प्रकोप को देखते हुए नकाफी है। कैंपों में पीड़ितों को सिर्फ दाल-चावल दिए जाने के मामले में भी विधायकों ने आक्रोश व्यक्त किया और स्वास्थ्य अधिकारियों को तलब कर दो-टूक शब्दों में मानवता निभाने की बात कही और कम से कम बच्चों को दूध दिए जाने के निर्देश दिए। इस दौरान हुई मौतों में आपदा राहत से गृहमंत्री की घोषणा के बाद भी 25-25 हजार की राशि भी अब तक पीड़ित परिवारों को अप्राप्त है। इस दौरान टीम में अवधेश गुर्जर, कृष्णदत्त तिवारी, मंदेश गुर्जर, शिवबालक यादव, योगेन्द्र सिंह, रमेश पाठक, संजय यादव, लवकेश गुर्जर, धरमजीत सिंह, बेचूराम वैश्य, अगस्त शर्मा, हजारी गुप्ता, मन्नू अग्रवाल, नूर आलम, चन्द्रभान राजवाड़े शामिल थे।

    जांच टीम ने उठाए सवाल-

    0 संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद बारिश से पहले डीडीटी का छिड़काव नहीं।

    0 टायफाइड जांच की व्यवस्था नहीं, खून चढ़ाने रिफर किया जा रहा सूरजपुर

    0 अधिकांश बच्चे हैं कुपोषित, सरकारी योजना का नहीं हुआ बेहतर क्रियान्वयन

    0 मलेरिया पीड़ित कुपोषित बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने अब भी कोई प्रयास नहीं

    0 गुणवत्ताविहीन रेडी टू ईट से सुपोषण की मंशा हो रही विफल

    0 एक साथ 50-100 मरीजों को भर्ती कर इलाज की सुविधा नहीं

    0 रायपुर-अंबिकापुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं पर भी नहीं हुआ विचार

    0 कोल्हुआ बेस कैंप और बिहारपुर अस्पताल में एक-एक बेड पर दो-दो मरीज

    0 स्थिति इतनी खराब कि दवा देकर मरीजों को भेज दिया जा रहा है घर

    कांग्रेस की यह है मांग-

    0 बेस कैंप में खड़ा कर रखे गए चलित मेडिकल वैन को भेजा जाए गांव-गांव

    0 पांच-छह और चलित मेडिकल वैन के साथ रायपुर और अंबिकापुर से पहुंचें विशेषज्ञ टीम

    0 परिवार के सदस्य संख्या के अनुरुप उपलब्ध कराया जाए मच्छरदानी

    0 गंभीर मरीजों को दवा देकर घर भेजने के बजाए भर्ती कर इलाज की हो सुविधा

    0 समूचे क्षेत्र को घोषित किया जाए संक्रमित महामारी का इलाका

    0 रेडी टू ईट की गुणवत्ता में सुधार कर कुपोषण में कमी का हो प्रयास

    0 टायफाइड जांच व खून चढ़ाने की व्यवस्था हो कैंप व बिहारपुर में

    0 सभी प्रभावित ग्रामों में खुले चिकित्सा शिविर, तैनात हों विशेषज्ञ चिकित्सक

    एक और बालक की मौत-

    काम चलाऊ जांच व उपचार की व्यवस्था से मलेरिया से मौत जारी है। रविवार की सुबह विशालपुर निवासी कमला प्रसाद विश्वकर्मा के चार वर्षीय पुत्र रामा विश्वकर्मा की मौत हो गई। अब तक क्षेत्र में मलेरिया से मरने वालों की संख्या 19 हो गई है। ओड़गी विकासखंड का बिहारपुर क्षेत्र जहां मलेरिया से कराह रहा है वहीं कई गांव ऐसे हैं जहां उल्टी-दस्त से लोग पीड़ित होने लगे हैं। कुप्पा गांव में उल्टी-दस्त से मौत के बाद भी प्रशासन प्रभावित इलाकों में त्वरित जांच व उपचार सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर नहीं है। देवढी बिहारपुर के हरिप्रसाद पिता देवलाल 35 वर्ष, सोनकुंवर पति हरिप्रसाद 30 वर्ष व उनके आठ वर्षीय पुत्र को गंभीर स्थिति में सूरजपुर जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है।

    व्यवस्था नहीं सुधरी तो करेंगे सत्याग्रह-शफी

    पीसीसी सचिव शफी अहमद ने कहा है कि मलेरिया प्रभावित बिहारपुर क्षेत्र की स्थिति चिंताजनक है। मलेरिया से सिलसिलेवार मौत और लगभग डेढ़ हजार लोगों के पीड़ित होने के बावजूद काम चलाऊ इलाज की व्यवस्था की गई है। सरकार की लापरवाही व असंवेदनशीलता ने बिहारपुर क्षेत्र को ऐसी स्थिति में खड़ा कर दिया है जहां हर कोई गमगीन है। पीसीसी की टीम ने इलाके के दौरे में जो कमियां पाई है उन कमियों को जिला प्रशासन को अवगत करा व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की मांग की जाएगी। यदि जांच और उपचार के साथ कुपोषण दूर करने ठोस प्रयास नहीं हुआ तो हम कांग्रेसजन तब तक सत्याग्रह करेंगे जब तक शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ जांच और उपचार की व्यवस्था न करे।

    और जानें :  # maleriya k prakop
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