नवापारा-राजिम (बिशेसर हिरवानी)। गरियाबंद जिले की राजिम विधानसभा सीट 'राजिम कल्प कुंभ' शुरू होने के साथ देश-दुनिया के नक्शे में तेजी से उभरी है। हालांकि नदी के बीच में शौचालय और मुरुम पाटने समेत अन्य कई वजह से विवाद भी हुआ। कभी कांग्रेस की गढ़ रही राजिम विधानसभा सीट में पिछले चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने विकास के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन विकास सिर्फ शहरों तक सिमट कर रह गया। ग्रामीण अंचल में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैैं।

ग्रामीणों सड़कों की स्थिति खराब है। शिक्षा के क्षेत्र में तो इस विधानसभा ने काफी उन्नति की है। जवाहर नवोदय विद्यालय, आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य स्कूल, आइटीआइ, स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत कुछ निजी विश्वविद्यालय खुले हैं। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों को रायपुर पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

भूगोल : राजिम प्रदेश की जीवनदायिनी महानदी के तट पर स्थित है। महानदी की सहायक नदियां पैरी व सोंढूर नदी के संगम के इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहते हैं। सीमाएं रायपुर व धमतरी जिले से लगी होने के साथ ओडिशा को छूती हैं।

प्रशासन : अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय, व्यवहार न्यायालय सहित प्रमुख कार्यालयोंं के अलावा अन्य शासकीय कार्यालयों का सफल संचालन यहां हो रहा है।

शिक्षा : 23 हायर सेकेंडरी स्कूल, 13 हाईस्कूल, 81 मिडिल स्कूल सहित 161 प्राथमिक शालाएं हैं। हालांकि शिक्षकों की कमी है। कॉलेज व निजी विवि भी हैं। केंद्रीय विद्यालय की मंजूरी भी मिली है।

सड़क : विधानसभा क्षेत्र में पक्की व कांक्रीट सड़कों का जाल बिछा हुआ है। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट गांव को शहरों से जोड़ने के लिए चल रहे हैं। तर्रीघाट पर कार्य अभी अधूरा है। गांवां की सड़कोंं के मेंटनेंस की जरूरत है।

आर्थिक : कृषि इस विधानसभा क्षेत्र के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है। महानदी के तट पर होने के चलते किसान दोहरा फसल का लाभ भी लेते हैं, साथ ही क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है।

स्वास्थ्य : स्वास्थ्य के मामले में विधानसभा में और सुधार की जरूरत है। डॉक्टरों, स्टाफ व उन्न्त तकनीक के इलाज की कमी के चलते आज भी यहां के लोगों को राजधानी रायपुर का रुख करना पड़ता है। वर्तमान में छुरा व राजिम मेें 30 बिस्तर अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

चार साल में हुए प्रमुख कार्य

- अनुविभागीय कार्यालय का दर्जा राजिम को प्राप्त

- राजिम को स्नातकोत्तर महाविद्यालय का दर्जा प्राप्त

- त्रिवेणी संगम पर लक्ष्मण झूला का निर्माण कार्य जारी

- नवोदय विद्यालय का संचालन प्रारंभ

- राजिम कुंभ के दौरान मुरुम की सड़कोंं के स्थायी समाधान के लिए सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण

- राजिम से छुरा पहुंच मार्ग पर तीन बड़े पुलोंं का निर्माण, जिनमें दो का कार्य पूर्ण हो चुका है, एक बाकी है।

- राजिम-महासमुंद पहुंच मार्ग में हथखोज के पास बड़े पुल का निर्माण कार्य पूर्ण।

- राजिम एवं फिंगेश्वर में 30 बिस्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण कार्य जारी

- फिंगेश्वर में कॉलेज भवन, राजिम व गरियाबंद शहर को महाविद्यालय भवन के लिए एक करोड़ रुपये की स्वीकृति

- छुरा एवं फिंगेश्वर मेंं आइटीआइ का शुभारंभ

-आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य स्कूल का संचालन प्रारंभ

-पिपरछेड़ी जलाशय का निर्माण एवं कोपरा मेें एनीकट का निर्माण

ये बन सकते हैं चुनावी मुद्दे

- राजिम तीर्थ में राजिम कुंभ के बहाने महानदी में मुरुम पाटने से लोगोंं में आक्रोश

- विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे जिले में उच्च तकनीकी शिक्षा की कमी

- जिला अस्पताल समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रोंं में डॉक्टरों एवं दवाइयोंं की कमी

- किसानों को बेवजह थमाए जा रहे महंगे बिजली बिल

- पूरे विधानसभा क्षेत्र में पटवारी, कोटवार, ग्राम सेवक व शिक्षकों की कमी

- अधूरे निर्माण कार्य, जिनमें लक्ष्मण झूला, सस्पेंशन ब्रिज व तर्रीघाट के पास पुल का अधूरा निर्माण शामिल

- क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रही शराब की अवैध बिक्री

- बड़े उद्योगोंं व कारखानों का विकास न हो पाना व रोजगाार की कमी

- कोपरा व बासिंग को नगर पंचायत बनाने का वादा अधूरा

- सामुदायिक भवनोंं सहित नहरोंं का निर्माण कार्य अधूरा

मेरे बोल

एक जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि सेवक के रूप में दिन-रात एक कर शासन की योजनाओं को दूर वनांचल में रह रहे गरीब, किसान, मजदूर सहित सब वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया। मूलभूत सुविधाओं को ध्यान मे रखते हुए सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। जलाशय व एनीकट निर्माण कर सिंचाई का रकबा बढ़ाने के साथ आसपास के जिलोंं से संपर्क जोड़ने के लिए पुलों का निर्माण कार्य किया। पक्की सड़कों के साथ अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए भी प्रयास किया। और भी महत्वपूर्ण कर्यों के लिए मैंने सपने सजा रखे हैं, अगर क्षेत्र की जनता चाहेगी कि तो वापस मैं इस विधानसभा क्षेत्र को सभी के सहयोग से आगे ले जाने का प्रयास करूंगा - संतोष उपाध्याय, विधायक राजिम विधानसभा

विकास एवं निर्माण कार्य के बहाने क्षेत्र की जनता को गुमराह किया जा रहा है। क्षेत्र की जनता सब कुछ जानती है कि विकास कार्य असल में हो रहा है या फिर केवल कागजों पर। विभागीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। शिक्षकों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के साथ अधूरे विकास कार्य विकास की व्याख्या कर रहे हैं। क्षेत्र में विकास कार्य के कितने भी दावे ठोक लिये जाएं, क्षेत्र की जनता किसी भी चीज से अंजान नहीं है और इसका माकूल जवाब आगामी चुनाव में देगी - अमितेश शुक्ल, कांग्रेस प्रत्याशी 2013

मतदाताओं का गणित

कुल मतदाता - 117000

पुरुष संख्या - 58450

महिला संख्या - 58550

पोलिंग बूथ - 141

कांग्रेस को अपनी पारंपरिक सीट को वापस पाने के लिए करनी पड़ेगी मशक्कत

करीब सवा लाख के आसपास की वोटर संख्या वाले इस विधानसभा क्षेत्र में आजादी के बाद से कांग्रेस के दिग्गजों का ही बोलबाला रहा है। अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पं. श्यामाचरण शुक्ल भी इसी विधानसभा के रहवासी थे और इस क्षेत्र से चुनाव भी लड़े थे। वे इस क्षेत्र से सर्वाधिक बार विधायक रहे। 2003 में भाजपा के चंदूलाल साहू ने इस सीट से कांग्रेस के अमितेश शुक्ल को हराया। 2008 के चुनाव मेंं कांग्रेस ने अमितेश शुक्ल को टिकट दिया तो भाजपा ने संतोष उपाध्याय को। करीब 39 सौ वोट से जीतकर शुक्ल विधानसभा पहुंचे। 2013 के चुनाव मेंं फिर दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस बार उपाध्याय ने करीब 24सौ वोटों ने मैदान मार लिया।