बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आत्मनिर्भर बनकर समाज में नया मुकाम हासिल करने वाली विमला ने छोटी शुरुआत कर सफल उद्यमी बनने तक का सफर तय किया है। अभी वह 130 प्रकार के मसाले बनाने पारंगत हो गई है और अब मसाला क्वीन के नाम से जानी जाती है। साथ ही अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने ट्रेनिंग देती है। स्वाद और शुद्धता ऐसी की राज्यपाल ने भी उन्हें प्रुफटैग के पुरस्कार से नावाजा है।

चांटीडीह देवनंदन नगर फेस-1 निवासी विमला ने पति से मिली प्रेरणा से अपने छोटे-से मसाला व्यवसाय की शुरुआत की। महज दो रुपए के पैकेट से शुरू कर उन्होंने अपने इस व्यवसाय को उद्योग का दर्ज दिया। वहीं लोगों को ये बताया कि व्यवसाय में सफल होने के लिए ऊंची-ऊंची डिग्री की नहीं, बल्कि हौसले की जरूरत होती है। उन्होंने चांटीडीह में ही अपनी कार्यशाला बनाई है और उसका नाम भी महिला सम्मान दिया है। उनका कहना है कि महिलाओं का आत्मनिर्भर बन अपने सम्मान की रक्षा करना ही मुख्य उद्देश्य है। इस वजह से कार्यशाला का यह नाम रखा है। यहां बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

0 लगाती है स्टॉल

विमला आज भी कॉलोनियों और व्यापार मेले जैसे आयोजनों में स्टॉल लगाती है। उनका मानना है कि ऐसे में लोगों के बीच पहचान बनती है और काम को गति भी मिलती है।

0 कर्नाटक में मिला तीसरा स्थान

कर्नाटक में नेहरू युवा कला केंद्र की ओर आयोजित प्रदर्शनी में भी विमला हिस्सा ले चुकी है। वहां उनके मसालों की शुद्धता और गुणवत्ता के लिए उन्हें तीसरा स्थान मिला।