बिलासपुर(निप्र)। पुराने सिस्टम में आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराने के कारण तकनीकी खामियां आने लगीं हैं। इससे अब यात्रियों को असुविधा भी हो रही है। दरअसल जिन तीन ट्रेनों को एलएचबी कोच के साथ चलाई जा रही है वह जैसे ही प्लेटफार्म में आती है उसके कोच, इंडिकेशन बोर्ड के मुताबिक नहीं होते हैं। स्थिति यह है कि चार से पांच कोच के बाद पीछे के सभी कोच बोर्ड से अलग जगह पर खड़े हो रहे हैं। इसके चलते यात्रियों को रिजर्वेशन कोच ढूंढने में दिक्कत होती है।

एलएचबी कोच की लंबाई सामान्य कोच से अधिक होती है। जोनल स्टेशन के सभी प्लेटफार्म में जितने कोच इंडिकेशन बोर्ड लगाए गए हैं वे सामान्य कोच की लंबाई के मुताबिक हैं। एलएचबी की लंबाई अधिक होने के कारण शुरुआत के चार से पांच कोच ही इंडिकेशन बोर्ड के अनुसार खड़े होते हैं। इसके बाद के सभी कोच आगे बढ़ जाते हैं। मसलन बोर्ड में दिखाया कुछ और जाता है और मौके पर कुछ और कोच रहता है। सोमवार को बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के कोच की स्थिति भी कुछ इसी तरह थी। बोर्ड में बी-5 कोच दिख रहा था लेकिन वहां बी-7 कोच खड़ा था। इसके बाद के कोच में इसी तरह बोर्ड के मुताबिक नहीं थे। ऐसा नहीं कि रेल प्रशासन इस तकनीकी खामियों से अनजान है। लेकिन चाहकर भी इसमें बदलाव नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि अभी तीन ट्रेनें ही एलएचबी कोच से चल रही हैं। ज्यादातर ट्रेनें सामान्य कोच से चलने की वजह से एलएचबी कोच की साइज के मुताबिक इंडिकेशन बोर्ड को फीड करना भी मुश्किल है।

2 मीटर लंबाई का अंतर

सामान्य से एलएचबी कोच की लंबाई लगभग 2 मीटर अधिक है। एलएचबी का एक कोच 24 मीटर का होता है जबकि सामान्य कोच की लंबाई 22.09 मीटर होती है। इसी अंतर के कारण इंडिकेशन बोर्ड में दिखाए जा रहे नंबर के मुताबिक कोच नहीं आ रहे हैं।

इसलिए है जरूरी

कोच इंडिकेशन बोर्ड यात्रियों की सहूलियत के लिए लगाए गए हैं। इस इलेक्ट्रिॉनिक बोर्ड के जरिए यात्रियों को दूर से ही यह पता चल जाता है कि प्लेटफार्म में कौन से कोच कहां पर हैं। इस स्थिति में उसे किसी से पूछने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती और सीधे जिस कोच में रिजर्वेशन है उसमें बैठ जाता है।

इन ट्रेनों में एलएचबी कोच

- बिलासपुर- नई दिल्ली- बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस

- बिलासपुर- भगत की कोठी- बिलासपुर द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस

- बिलासपुर- बीकानेर- बिलासपुर द्वि- साप्ताहिक एक्सप्रेस

कोच के इधर-उधर होने से यात्रियों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। इसके बाद भी प्राथमिकता के साथ इसमें सुधार कर लिया जाएगा।

संतोष कुमार

सीनियर पीआरओ, दपूमरे जोन