0 भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला होने का लगाया नेता प्रतिपक्ष ने आरोप

0 प्रेसवार्ता के बाद रैली निकाल राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि राफेल लड़ाकू जहाज की खरीदी में देशहित को ध्यान में रखे बिना सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने का काम मोदी सरकार ने किया है। देश का हर नागरिक जानना चाहता है कि राष्ट्रहित की बात करने वाली सरकार ने देश की सुरक्षा को दांव लगाने का अक्षम्य अपराध कैसे किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने व्यवस्था को दरकिनार कर चाय के प्याले की तरह राफेल खरीदी का सौदा किया।

जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से श्री सिंहदेव ने कहा कि समझौते के तीन साल बाद भी एक हवाई जहाज की डिलीवरी भारत में नहीं हो सकी। संसद में जब जवाब मांगा जाता है तो सरकार कहती है यह देश की आंतरिक सुरक्षा का मामला है, जबकि संसद में सौदे व दर की जानकारी मांगी जा रही है। देश के हर नागरिक को इस घोटाले की जानकारी मिलनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा की एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने सौदे का पैमाना ही बदल दिया गया और जनता को गुमराह किया जा रहा है। रक्षा मंत्री तक को सौदे की जानकारी नहीं दी गई। इस खिलवाड़ की कोई निंदा करता है तो उसे देशद्रोही कहा जाता है। यदि ऐसे घोटाले को लोगों तक पहुंचाया नहीं गया तो भविष्य में इसके जिम्मेदार हम सब होंगे। एक सवाल के जवाब में श्री सिंहदेव ने कहा कि जो लोग बोफोर्स तोप का हल्ला उड़ाकर इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि बोफोर्स तोप कारगिल युद्ध में काम आई और जवानों ने इसके उपयोग के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जयकारे लगाए थे। इस दौरान विधायक चिंतामणी महाराज, अमरजीत भगत, पीसीसी उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, महामंत्री शफी अहमद, जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, मेयर डॉ. अजय तिर्की, द्वितेन्द्र मिश्रा, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, हेमन्त सिन्हा, पंकज सिंह आदि मौजूद थे।

यह होना था पर नहीं हुआ

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल में राफेल खरीदी की योजना बनाई और 126 विमान क्रय करने का समझौता किया। इसे जानकारों ने सर्वोत्कृष्ट सौदा माना था। इनमें 18 विमान बने बनाए स्थिति में फ्रांस से भारत लाए जाने थे। शेष 108 का निर्माण देश में ही होना था, किन्तु नई सरकार देश में बनी और प्रधानमंत्री ने 10 अप्रैल 2015 को फ्रांस सरकार से 36 विमानों का समझौता किया, जबकि 18 विमानों का समझौता होना था। 526.1 करोड़ में समझौता होना था जिसे 1670.7 करोड़ में कर लिया जो 41 हजार 205 करोड़ से अधिक है। 10 दिन पूर्व एक कंपनी का पंजीयन कराया, जिसे कोई अनुभव नहीं था। इसको एक लाख करोड़ में आजीवन मेंटेनेंस का करार कर लिया।

राष्ट्रपति के नाम पर सौंपा ज्ञापन

श्री सिंहदेव के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता घड़ी चौक पहुंचे और रैली की शक्ल में कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार तक पहुंचे। वहीं राफेल मामले से संबंधित चार पृष्ठ का ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को देकर मोदी सरकार के इस गड़बड़झाले की जेपीसी कमेटी से जांच कराने की मांग की है।