रायपुर। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आप बड़े संग्रहालय और संग्रहालय में रखे पुरातत्व और कई अवशेषों को देखे होंगे और पढ़े होंगे, लेकिन आपको राजधानी रायपुर के तीन ऐसे लोगों से रू-ब-रू करा रहे हैं, जिन्होंने अपने जुनून और कुछ करने की चाह से कुछ अलग किया है। जिसमें एक हैं मनोहर डेंगवानी, जो रेडियो कद्रदान हैं। वे 70 वर्षों से रेडियो संग्रह कर रहे हैं।

इसके चलते उनके घर का एक कमरा संग्रहालय में तब्दील हो गया है। कमरे में छोटे -बड़े लगभग 506 रेडियो हैं और गौर करने की बात यह है कि सभी रेडियो आज भी बजते हैं। वहीं दूसरे व्यक्ति हैं लक्ष्मी नारायण लाहौटी, जिन्हें करेंसी नोट और सिक्कों का संग्रह करने का शौक है।

इन्हें नोटो में प्रिंटेड यूनिक नंबर और सीरीज संग्रह करने का शौक है। इन्होंने अभी तक कई यूनिक नंबर के नोट संग्रह किए हैं। एक बात आपको बताता चलूं कि एक नोट छह डिजिट का होता है। एक नोट सात डिजीट का होता है। जैसे कोई नोट 001001 शुरू हो रहा है और 999999 लास्ट हो रहा है।

इसमें एक नोट 10,00000 का होता है जो लाहौटी के पास है। उनका कहना है कि आरबीआइ द्वारा प्रिंटेड कोई भी ऐसा डिजिट के नंबर नहीं है, जो मेरे पास नहीं है। तीसरे लक्ष्मी अग्रवाल हैं, जिन्हें आरबीआइ द्वारा प्रिंट नोट और सिक्के जो मिस प्रिंट या फिर किसी प्रकार के डिफोल्ड रहता है, उसका संग्रह करते हैं, जिन्होंने अभी तक लगभग तीन हजार नोट और लगभग 15 सौ सिक्कों का संग्रह किए हैं। यह सिलसिला लगभगभ 30 साल पहले शुरू हुआ और आज भी जारी है।

रेडियो की आवाज से खुलती थीं आंखें, सात साल के उम्र से कर रहे रेडियो संग्रह

डिजिटल के इस दौर में घर में रेडियो कोन रखना चाहता है। रखते की बात तो दूर है आज तो लोग रेडियो सुनना पसंद नहीं करते है। अगर कोई रेडियो सुन रहा है तो वे रेडियो का कद्रदान माना चाता है या फिर पुराने गाने की शौकीन माना जाता है।

ऐसे में ही एक हैं मनोहर डेंगवानी, जिन्होंने सात साल के उम्र से रेडियो का संग्रह करना चालू किया और यह कारवां आज तक जारी है। उनके घर का एक कमरा केवल रेडियो से भरा पड़ा है, जिसमें लगभग 506 रेडियो हैं और सभी रेडियो चालू हैं, जिसमें सबसे पुराना रेडियो 1948 का है, जिसे मनोहर के पिता ने मात्र सात रुपये में खरीदा था और उसी को सुनकर इनके अंदर रेडियो संग्रह करने का शौक जगा और यह कारवां अभी तक जारी है।

दो घंटा हर दिन देते हैं रेडियो को

मनोहर व्यापारी हैं। हर दिन दुकान से आने के बाद रेडियो के लिए दो घंटा समय देते हैं। रेडियो सुनने के साथ बिगड़े रेडियो की मरम्मत करते हैं। इनके संग्रह के आज भी सभी रेडियो चालू हैं।

करेंसी नोट और यूनिक नंबर का ऐसा संग्रह, जो कई रिकार्ड है शुमार

हर इंसान का अपना शौक होता है। वही शौक किसी को बुलंदी तक पहुंचाता है और ख्याति भी दिलाता है। जी हां, कुछ ऐसा ही शौक है लाहौटी का, जो लगभग 17 सालों से चल रहा है। इनके पास करेंसी नोट और नोटो की सीरीज और नंबर का कई संग्रह है यानी यूं कहें कि घर में नोटों और सिक्कों का एक संग्रहालय है, जिसमें एक से बढ़कर एक सीरियल नंबर हैं, जिसमें 10 रुपये के एक 10-10 नोट ऐसे हैं, जिनका छह डिजिट नंबर एक ही है।

जैसे 200200 का कोई नोट है तो इसका 10 नोट का संग्रह है। इसी प्रकार ऐसे हजार नोट हैं। वहीं 786786 के एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के नोट हैं। इसके साथ ही एक पैसा से लेकर 100 तक के सिक्के उनके पास हैं, जो पुराने जमाने से लेकर अभी तक के हैं।

कटे-फटे और मिस प्रिंट का अनोखा संग्रह, जिसमें नोट और सिक्के शामिल हैं

आरबीआई द्वारा प्रिंटेड और बनाए गए नोट जो किसी कारण मिस प्रिंट या बनकर बाजार में आ जाते हैं, जिसे हम और आप देखकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इनका एक कद्रदान ऐसा है कि जो 30 सालों से संग्रह कर रहा है। अभी तक 3000 नोट और 1500 सिक्कों का संग्रह किए हैं। लक्ष्मी अग्रवाल ने बताया कि हमे कहीं भी मिस प्रिंट और खोटे सिक्के दिख जाते हैं तो उससे मांग लेते हैं या खरीद लेते हैं।

मुंबई में सबसे पहले खरीदा था 100 का नोट

लक्ष्मी किसी काम से मुंबई गए थे। वहां एक नोट देख उन्हें उत्सुकता हुई और 100 के नोट को 165 रुपय में खरीद लिए और तब से संग्रह करने का सिलसिला शुरू है। आज आलम ऐ है कि लोग वैसे नोट या सिक्कों को हमें खुद सौंपते हैं।