गौरेला। नईदुनिया न्यूज

जैन धर्मावलंबियों ने भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव आयोजित किया। इसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। सुबह से ही जैनमंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई और मध्यान्ह में आचार्य विद्यासागर के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि पुष्पदंत सागर महाराज के प्रवचन के बाद नगर में शोभायात्रा निकाली गई।

मुनि पुष्पदंत महाराज ने भगवान महावीर के जीवन वृत्तांत का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य साधनों से नहीं साधना से महान बनता है। अहिंसा के प्रभाव का उल्लेख करते हुए बताया कि महात्मा गांधी ने जैनधर्म के सिद्घांतों का अनुशरण कर भारत को स्वतंत्र कराया और गांधीजी के पथ का अनुशरण कर विश्व के अनेक देशों ने आजादी पाई। उन्होंने कहा कि जोड़ने की अपेक्षा छोड़ने त्याग की प्रवृति आत्मसात करने से मानव जीवन सफल होता है। मुनि संसारिक साधन छोड़कर पथ प्रशस्त करता है। पाश्चात्य शिक्षा शैली के प्रति सचेत करते हुए बताया कि प्राचीन काल मे भारत से संपूर्ण संसार शिक्षा ग्रहण करते थे। कांवेन्ट के शाब्दिक अर्थ को समझाते हुए कहा कि अनाथालय का शिक्षण प्रबंध है। भारत गुरुकुल की आदर्श शिक्षा छोड़कर पश्चिम के पीछे क्यों भाग रहा है। आवश्यकता से अधिक संग्रह पाप वृत्ति है। भगवान महावीर ने संसार को जीवन जीने की कला सिखाई और अपना कल्याण किया साथ ही संसार को राह दिखाई। संध्या पूर्व नगर में भगवान महावीर की शोभायात्रा निकाल कर उनके संदेशों की जानकारी देते हुए से वेदचंद जैन ने बताया कि विमान में भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान कर मुनि पुष्पदंत महाराज के सानिध्य में प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया। इस अवसर पर खोडरी जैन समाज के सदस्य भी उपस्थित थे। गौरेला जैन समाज के विट्ठल भाई, प्रकाश चंद, अशोक जैन, वेदचंद जैन, किशोर जैन, अध्यक्ष दीपक जैन, उपाध्यक्ष शानु जैन, सचिव जितेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष उत्तम चंद, विमल जैन, कोमल चंद जैन, संदीप सिंघई, सुधीर जैन सहित बड़ी संख्या में महिलाएं भी शोभायात्रा में शामिल थीं।