0 अधिवक्ता संघ के सहभागिता के बाद भी उम्मीदों के अनुरूप प्रकरणों का निराकरण नहीं

0 बैंक वसूली का एक व बिजली बिल का दो प्रकरण भी लोक अदालत में निपटा

0 कुल तीन लाख 81 हजार 663 रुपये के सेटलमेंट अमाउंट पर प्रकरणों का निराकरण

फोटो-17, 18-लोक अदालत में पहुंचे लोग व खंडपीठ

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अधिवक्ता संघ की सहभागिता के बावजूद शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते से प्रकरणों के निराकरण के लिए पक्षकारों ने उम्मीदों के अनुरूप रूचि नहीं दिखाई। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 7363 प्रकरण आपसी समझौते से निपटारे के लिए रखे गए थे। इनमें से मात्र 99 का ही निराकरण हो सका। इसमें भी 42 प्रकरण नगर निगम के जल कर से संबंधित थे।

शनिवार को जिला व सत्र न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला व सत्र न्यायाधीश बीपी वर्मा सहित अन्य न्यायाधीशों ने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कई खंडपीठ बनाए गए थे और आपसी समझौते से प्रकरणों को निराकरण के लिए रखा गया था। पूर्व में जिला अधिवक्ता संघ ने राष्ट्रीय लोक अदालत में सहभागिता दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया था। शुक्रवार की देर शाम हाई कोर्ट के रजिस्टार व स्टेट बार कौंसिल के सचिव से हुई चर्चा के बाद अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय लोक अदालत में शामिल होने का निर्णय ले लिया था। इसके बावजूद शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में उम्मीदों के अनुरूप पक्षकार नहंी पहुंचे। विभिन्न बैंकों के अलावा बीएसएनएल, छग विद्युत राज्य कंपनी ने भी अपने-अपने स्टाल लगाए थे, लेकिन अधिकांश समय यहां वीरानी ही नजर आई। गिने-चुने पक्षकार ही राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते से प्रकरणों के निराकरण के लिए पहुंचे। जिला व तालुका स्तर पर बनाए गए 13 खंडपीठों में प्रीलिटीगेशन के 6787 प्रकरण रखे गए थे, जिसमें 47 का निराकरण दो लाख 26 हजार 663 रुपये के समझौता राशि से किया गया। न्यायालयों में लंबित कुल 576 प्रकरण भी लोक अदालत में रखे गए थे, जिसमें 52 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमें एक लाख 55 हजार का अवार्ड पारित किया गया। लोक अदालत में कुल 7363 प्रकरणों में 99 प्रकरणों का सुलह समझौते के आधार पर निराकरण किए गए। सेटलमेंट अमाउंट तीन लाख 81 हजार 663 रुपये हुआ। लोक अदालत आयोजन के दौरान जिला व सत्र न्यायाधीश बीपी वर्मा अलग-अलग खंडपीठों में पहुंचकर अधिकारियों, न्यायाधीशों से भी चर्चा की।

राजी-खुशी माफी मांग किया समझौता

राष्ट्रीय लोक अदालत में द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 भूपेश बसंत के न्यायालय में धारा 294, 506बी, 323 का लंबित प्रकरण भी रखा गया था। प्रकरण में आरोपी रंजीत व विमला तथा पीड़ित पक्ष में चरन सिंह व बलजीत शामिल थे। सभी आपस में नजदीकी रिश्तेदार हैं। आरोपी रंजीत पीड़ित चरन का पुत्र व बलजीत का भाई है तथा आरोपी विमला, चरण की बहू व बलजीत की भाभी है। घटना में रंजीत व विमला ने चरन व बलजीत के साथ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट की थी। लोक अदालत के दौरान आरोपी व पीड़ित पक्ष को समझौते की समझाइश देने पर आरोपी रंजीत ने पिता व भाई से तथा आरोपी विमला ने ससूर व जेठ से राजी-खुशी न्यायालय के समक्ष माफी मांगकर समझौता करने की इच्छा जाहिर की। इसपर पीड़ित पक्ष के पिता व भाई ने दोनों को माफ कर समझौते के आधार पर प्रकरण निराकृत करने न्यायालय से निवेदन किया। दोनों पक्षों के आग्रह पर समझौते से प्रकरण निराकृत हुआ।

आश्वासन पर अधिवक्ता हुए शामिल

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक दुबे ने बताया कि विभिन्न मांगों, समस्याओं को लेकर संघ ने लोक अदालत में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया था। उक्त समस्याओं के निराकरण के लिए हाई कोर्ट बिलासपुर के रजिस्टार व राज्य अधिवक्ता परिषद के सचिव द्वारा आश्वासन दिया गया है। हाई कोर्ट रजिस्टार व राज्य अधिवक्ता परिषद के सचिव ने चर्चा के दौरान आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के निराकरण की पहल शुरू कर दी गई है। इसी आधार पर अधिवक्ता संघ ने लोक अदालत के कार्य से पृथक रहने के प्रस्ताव को स्थगित किया। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में अधिवक्ता शामिल हुए और लोक अदालत के कार्यों में अपना सहयोग भी दिया।