रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) का लाभ रायपुर जिले में हितग्राहियों को सबसे अधिक मिला है। यहां लगभग हर हितग्राही को सीट मिल गई। दिलचस्प यह है कि 23 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं पहुंचा, इनमें से ज्यादातर स्कूल हिन्दी माध्यम के हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां पर सीट के मुकाबले कम आवेदन आए हैं। एक हजार 118 बच्चों का दाखिला बिना लॉटरी के हो गया है, इन्हें सीधी भर्ती दी गई। इनके अलावा 6 हजार 402 सीटों के लिए लॉटरी निकाली गई। 8500 सीटों में से महज 490 सीटें रिक्त रह गईं। गौरतलब है कि राजधानी के निजी स्कूलों में 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक फीस है, जो कि गरीबों के वश के बाहर है। आरटीई के जरिये गरीबों के बच्चों का ऐसे निजी स्कूलों में दाखिला हो जाता है।

गरीबी साबित करने में पिछड़ रहे पालक

नोडल स्तर पर छानबीन के दौरान हजारों पालक मापदंड पूरा नहीं कर पा रहे हैं। बच्चे को मुफ्त में पढ़ाने के लिए खाद्य विभाग की ओर से जारी राशन कार्ड दिखाया जा रहा है, लेकिन गरीबी रेखा के नीचे यानी बीपीएल परिवार साबित करने के लिए यह नाकाफी है। जनगणना 2011 की बीपीएल सूची में नाम है या नहीं, इसकी जांच में ज्यादातर पालक अटक रहे हैं। 18 जून तक दाखिला कराना है, गरीबी या मापदंड पूरा नहीं करने पर सैकड़ों पालकों के बच्चों का दाखिला रुक सकता है।

यह है आरटीई के फायदे

शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीट पर उस इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गरीब बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य है। प्राइमरी के लिए 7000 रुपये पढ़ाई, 250 रुपए यूनीफार्म और 400 रुपए पुस्तक-कापी , मिडिल में 11400 रुपये पढ़ाई व 650 रुपए यूनीफार्म व पुस्तक के लिए राज्य सरकार देती है।