रायपुर। विधानसभा चुनाव में हर दो किलोमीटर की दूरी पर मतदान केंद्र बनाना है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में चुनाव आयोग के नियमों का पालन करना संभव नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में पांच से छह किलोमीटर पर बूथ बनाया जाएगा। दरअसल विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों खासकर बस्तर संभाग में बूथों की सुरक्षा बड़ी चुनौती है।

इसकी वजह से निर्वाचन आयोग मानक के अनुरूप बूथ निर्माण नहीं करा पा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियां ही नहीं ऐसे इलाकों में पोलिंग पार्टियों की सुरक्षा भी बड़ा मसला है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कुल 23632 मतदान केंद्र बनाने का प्रस्ताव है। इस बार 234 नए मतदान केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। 333 मतदान केंद्रों को परिवर्तित भी किया गया है। परिवर्तित होने वाले अधिकांश मतदान केंद्र धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में हैं।

करीब 900 बूथ संवेदनशील माने जा रहे हैं, जिनमें 200 पोलिंग बूथ नक्सल क्षेत्र में हैं। इन बूथों तक पहुंचने के लिए सड़कें नहीं हैं। ऐसी जगहों पर पोलिंग पार्टियों को 20 से 25 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। पोलिंग पार्टियों को सुरक्षित पहुंचाना जवानों के लिए भी बड़ी चुनौती रहती है।

मतदाताओं को पोलिंग बूथ पर पहुंचने के लिए दिक्कत न हो इसके लिए आवादी से दो किलोमीटर के भीतर पोलिंग बूथ बनाना है। नक्सल प्रभावित नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और राजनांदगांव जिले की चार विधानसभा सीटों के कुछ हिस्सों में पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर पोलिंग बूथ बनाया जाएगा।

पहाड़ी क्षेत्रों में दो-दो किलोमीटर की दूरी पर बसाहट नहीं है, जहां पर बसाहट है वहां जनसंख्या बहुत कम है। ऐसे में संभव नहीं है कि दो किलोमीटर के अंदर पोलिंग बनाया जा सके।