रायपुर। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री पारदर्शिता के साथ विधिक रूप से सही और आसानी से हो सके इसके लिए ई-पंजीयन प्रणाली प्रारंभ की गई है। इसके उत्साहजनक नतीजे भी मिल रहे हैं। ई-पंजीयन प्रणाली के माध्यम से नागरिकों को शीघ्र और बेहतर सुविधा मिल सके, इसके लिए कलेक्टर ओपी चौधरी ने शुक्रवार को रेडक्रास सभा कक्ष में राजस्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों की बैठक ली।

उन्होंने राजस्व विभाग के सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। फील्ड अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषि भूमि, भवन, भूखण्ड आदि के दस्तावेजों बी-वन, पांचसाला, खसरा के कम्प्यूटरीकरण का कार्य शीघ्र संपादित करें। विक्रय की गई सम्पत्ति के खसरे एवं रकबे को भुइंया सॉफ्टवेयर में अंकित करें।

इससे ई-पंजीयन के दौरान जमीन संबंधी दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन हो सके। उन्होंने सॉफ्टवेयर के माध्यम से कृषि भूमि के साथ नजूल एवं व्यपवर्तित भूमि का सत्यापन करने, रजिस्ट्री से संबंधित लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने को कहा। बैठक में अनुविभागीय दण्डाधिकारी रायपुर संदीप अग्रवाल, जिला पंजीयक बीएस नायक भी उपस्थित रहे।

पहली तिमाही में 16 हजार दस्तावेजों का हुआ पंजीयन-

वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ऑनलाइन पंजीयन के द्वारा जमीन, जायदाद के 16 हजार 44 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में किए गए पंजीयन की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। रजिस्ट्री करवाने के लिए अनिवार्य बिन्दु विधिक रूप से निर्धारित है। न्यायालयों में पारित आदेशों के परिपालन और ऑडिट के परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजों को विधिक रूप से सही रहने के नियमों को कम्प्यूटरीकृत ई-पंजीयन प्रणाली का हिस्सा बना लिया गया है।

जमीन खरीदी से पहले जांच परख लें-

रजिस्ट्रीकरण नियम 1939 के तहत जमीन की पहचान हेतु बी-1, खसरा, भू-खण्ड का लेख किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रत्येक भूमि का कुल रकबा में से कितना रकबा रजिस्ट्री के लिए विचार में लाया जा रहा है, उसका भी स्पष्ट उल्लेख एवं चिन्हांकन होना अनिवार्य है। पूर्व में यह मैनुवली प्राप्त होता था। अब यह कार्य ऑनलाइन हो गया है।

पंजीयन एवं राजस्व के सॉफ्टवेयर आपस में जोड़कर किया जा रहा है। भूमि के पंजीयन के लिए पटवारी के हाथ से लिखा हुआ मैन्युएल नकल के बजाय कम्प्यूटरीकृत नकल प्राप्त की जा रही है। भुइंया वेबसाइट से यह नकल आसानी से प्राप्त की जा सकती है। खरीदारों को पंजीयन करवाने के पहले यह परख लेना चाहिए कि उनके द्वारा खरीदी जा रही संपत्ति का भुइंया सॉफ्टवेयर में सत्यापन हो रहा है या नहीं।